सी एस पाण्डेय
O- वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद ट्रांसमिशन बाधाएं दूर
O- 30–40 किलोमीटर परिक्षेत्र के लगभग सौ गांव होंगे लाभान्वित
बभनी (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के म्योरपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत किरबिल में निर्माणाधीन 132 केवी विद्युत उपकेंद्र का कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने के बाद ट्रांसमिशन लाइन से जुड़ी प्रमुख बाधाएं दूर हो गई हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि आगामी एक माह के भीतर 30 से 40 किलोमीटर के परिक्षेत्र में स्थित लगभग सौ गांवों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
निर्माण कार्य अंतिम चरण में
विद्युत निगम के अनुसार उपकेंद्र का अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। केवल एक फाउंडेशन का कार्य शेष है, जिसे शीघ्र पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है। कार्य पूर्ण होते ही आपूर्ति प्रारंभ कर दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अवर अभियंता अवधेश कुमार ने बताया कि वन विभाग से एनओसी न मिलने के कारण ट्रांसमिशन लाइन बिछाने में विलंब हो रहा था। अब यह औपचारिकता पूरी हो चुकी है और कार्य में तेजी लाई गई है।
म्योरपुर को प्राथमिक लाभ, बभनी पर निर्णय शेष
अब तक म्योरपुर और बभनी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिपरी उपकेंद्र से संचालित हो रही थी। बीच में घना वन क्षेत्र, पथरीली भूमि और ऊंचे वृक्ष ट्रांसमिशन लाइन के लिए लगातार बाधा उत्पन्न करते थे, जिससे बार-बार आपूर्ति बाधित होती थी।
नए 132 केवी उपकेंद्र के चालू होने से:
- विद्युत आपूर्ति की स्थिरता बढ़ेगी
- 33 केवी लाइन की तकनीकी खराबियों से राहत मिलेगी
- ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या कम होगी
- बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट की शिकायतों में कमी आएगी
म्योरपुर को प्राथमिक लाभ, बभनी पर निर्णय शेष
अवर अभियंता ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण में म्योरपुर विकासखंड मुख्यालय और उससे जुड़े अधिकांश गांवों तथा कस्बों को सीधे इस उपकेंद्र से जोड़ा जाएगा। बभनी ब्लॉक को जोड़ने संबंधी अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर और पर्याप्त विद्युत आपूर्ति से क्षेत्र में लघु उद्योग, कृषि आधारित गतिविधियों और घरेलू उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से बिजली की अनियमित आपूर्ति से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह परियोजना बड़ी राहत साबित हो सकती है।
▪ 132 केवी उपकेंद्र का निर्माण अंतिम चरण में
▪ वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद ट्रांसमिशन बाधाएं समाप्त
▪ 30–40 किलोमीटर परिक्षेत्र के लगभग 100 गांव लाभान्वित
▪ एक माह के भीतर आपूर्ति प्रारंभ होने की संभावना






