जिला कारागार गुरमा में बंद एनडीपीएस आरोपी की इलाज के दौरान मौत, जेल प्रशासन पर उठे सवाल

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। जनपद सोनभद्र स्थित जिला कारागार गुरमा में निरुद्ध एक बंदी की इलाज के दौरान मौत से गुरुवार को हड़कंप मच गया। 26 वर्षीय राधेश्याम यादव की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान तड़के मौत हो गई, जिसके बाद जेल परिसर में सन्नाटा पसर गया। महिला और पुरुष बंदी शोकाकुल नजर आए, वहीं इस घटना ने जेल के भीतर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरा मामला चोपन थाना क्षेत्र अंतर्गत जिला कारागार गुरमा का है। मृतक राधेश्याम यादव पुत्र ओमप्रकाश यादव, निवासी उरमौरा, कोतवाली रॉबर्ट्सगंज, एनडीपीएस एक्ट के एक गंभीर मामले में 5 जनवरी 2026 से जेल में निरुद्ध था। कारागार अधीक्षक अरुण कुमार मिश्र के अनुसार, राधेश्याम नशे का आदी था। बुधवार देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे तेज खांसी के साथ कफ में खून आने की शिकायत हुई, जिसके बाद तत्काल उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि करीब एक घंटे तक चले इलाज के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

मृतक कैदी राधेश्याम यादव (फाइल फोटो)

मौत की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

गौरतलब है कि राधेश्याम यादव वही अभियुक्त था, जिसे 4 जनवरी 2026 को थाना रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने उसकी मां पानपत्ती देवी के साथ उरमौरा क्षेत्र से 20.70 ग्राम अवैध हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई थी। इस मामले में मु0अ0सं0-09/2026, धारा 8/21/29 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा गया था।

राधेश्याम यादव का आपराधिक इतिहास भी लंबा रहा है। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, गुंडा एक्ट समेत एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज थे। मृतक का भाई सोनू यादव भी वर्तमान में जेल में बंद है, जबकि उसकी मां पानपत्ती देवी की तीन दिन पूर्व ही रिहाई हुई थी।

बंदी की मौत के बाद जेल परिसर में मातम का माहौल है और पूरे प्रकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जेल में उसकी तबीयत अचानक इतनी गंभीर कैसे हो गई कि इलाज के दौरान जान चली गई। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।

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