सरकारी दर्जे की मांग पर अड़ीं आशा कर्मी, पीएम को ज्ञापन

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सोनभद्र –। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर बीते 15 दिसंबर 2025 से प्रदेश भर में आशा एवं आशा संगिनी कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। वर्षों से लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा शासन-प्रशासन स्तर पर कोई ठोस सुनवाई न होने से आशा कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
इसी क्रम में शुक्रवार को आशा कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के माध्यम से सौंपा।
यूनियन की सचिव जानकी देवी ने बताया कि आशा एवं आशा संगिनी वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ बनकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें आज भी मानदेय आधारित मानद स्वयंसेवक के रूप में रखा गया है। उन्होंने मांग की कि 45वें एवं 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए तथा प्रोत्साहन राशि के स्थान पर न्यूनतम वेतन व्यवस्था लागू की जाए।
आशा कर्मियों को ईपीएफ व ईएसआई की सुविधा, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा एवं 50 लाख रुपये का जीवन बीमा दिए जाने की भी मांग प्रमुख है। साथ ही न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को ₹21,000 तथा आशा संगिनी को ₹28,000 प्रतिमाह आधारभूत मानदेय दिया जाए।
इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना से जुड़े मूल कार्यों के अतिरिक्त कराए जा रहे अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशि तय कर उसका नियमित एवं पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई।
आशा कर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन देने वालों में सुनीता देवी, आमिना खातून, बबिता, राधिका, चिंता देवी आदि शामिल रही

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