अजीबोगरीब फरमान: बीएसए से मिलना है तो शर्ट की जेब और हाथ मे न हो मोबाइल

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अमित मिश्रा

कुछ दिनो पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में अध्यापिकाओं से वार्ता करते का वीडियो सोशल मीडिया पफ हुआ था वायरल,यही बताया जा रहा कारण

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिकारियों को बार-बार यह हिदायत देते रहते है कि आम जनता से अच्छा व्यवहार करें ताकि वह अपनी समस्या को आसानी से आपके समक्ष रख रखे लेकिन जनपद सोनभद्र में प्राथमिक शिक्षा देने वाले गुरू जी लोगो के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनन्द पाण्डेय ने एक तुगलगी फरमान जारी कर दिया कि अगर उनसे मुलाकात करनी है तो आपकी ऊपरी पॉकेट और हाथ मे मोबाइल नही होना चाहिए। अगर आप ऐसा नही कर सकते है तो आप बेसिक शिक्षा अधिकारी से नही मिल सकते है। यह फरमान उन्होंने की वजह से जारी किया यह तो वही जाने लेकिन उनके इस आदेश से उनके विभागीय कर्मचारी व शिक्षक और शिक्षिका ज्यादा हैरान है।

योगी सरकार में प्रदेश के अधिकारियों का अजीबो-गरीब आदेश अक्सर सुर्खियों में रहता हैं। अब सोनभद्र जिले से ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने कार्यालय में शिक्षकों, कर्मचारियों और आगंतुकों पर मोबाइल हाथ में या ऊपर की जेब में रखकर आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने जारी अपने आदेश में साफ लिखा है कि कोई भी व्यक्ति यदि कार्यालय में आता है तो उसके पास मोबाइल जेब में ऊपर दिखाई नहीं देना चाहिए और न ही हाथ में होना चाहिए।

हालांकि इस आदेश के पीछे हाल ही में हुआ विवाद माना जा रहा है। कुछ दिन पहले महिला शिक्षकों से संबंधित एक प्रकरण में हंगामा हुआ था और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे थे। माना यह भी जा रहा है कि उसी से बचाव के लिए यह अनोखा आदेश जारी कर दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग आसानी से न हो सके।

वही जनपद के संगठनों और कर्मचारियों में इस आदेश को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यह फैसला पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। आज के डिजिटल युग में मोबाइल पर रोक लगाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर अधिकारी किस बात से डर रहे हैं।

बीएसए के इस अजीबोगरीब फरमान पर आम लोगों का भी कहना है कि जब अधिकारी अपने काम में ईमानदार और पारदर्शी हों तो किसी वीडियो या रिकॉर्डिंग से डरने की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। इस तरह का फरमान केवल अविश्वास पैदा करता है।

बोले अधिकारी:- इस आदेश के सम्बंध में बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनन्द पाण्डेय का कहना है कि यह कदम उन्होंने कार्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया है।

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