वैदिक मंत्रो के उच्चारण के साथ लोगो ने किया सतत वाहिनी नदी के घाट पर पितृ तर्पण

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वीरेंद्र कुमार

विंढमगंज(सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। स्थानीय क्षेत्र की सतत वाहिनी नदी के छठ घाट पर स्थानीय लोगों के द्वारा अपने पितरों के लिए श्राद्ध तर्पण पंडित राजू रंजन तिवारी के द्वारा वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ तर्पण,अर्पण और समर्पण की भाव लेकर कर्मकांड किया जा रहा है।


श्रद्धा दर्पण का कर्मकांड कर रहे पंडित राजू रंजन तिवारी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक पितृगण पृथ्वी लोक पर अपने गोत्र परिवार में अनेक रूप से विचरण करते हुए स्वजनों से तर्पण की अभिलाषा करते हैं इसलिए भद्रपद पूर्णिमा से लेकर अश्वनी कृष्ण पक्ष अमावस्या तक पितरों को तृप्त के लिए तर्पण पिंडदान आदि करने का विधान है। श्रद्धा न करने से पितरों को दुख तो होता ही है साथ में श्रद्धा नहीं करने वालों को भी कष्टों का सामना करना पड़ता है पितरों के लिए श्राद्ध तर्पण दैनिक भोजन जैसा होता है। आश्विन मास का पितृपक्ष का यह पखवाड़ा एक सामूहिक महापर्व माना जाता है। इस विशेष काल में पितरों का सामूहिक आह्वान और तर्पण किया जाता है जिसे पार्वण श्रद्धा कहा जाता है।

यह श्रद्धा ठीक उसी प्रकार होता है जैसे हम सामान्य दिनों में नियमित समय पर भोजन करते हैं जबकि त्योहार या विशेष अवसरों पर दिन या रात किसी भी समय भोजन करते हैं ठीक उसी प्रकार अश्विन कालीन पितृ पक्ष पितरों का सामूहिक मेला है।

इस समय सभी पितर अपने पृथ्वी लोकस्थ सगे संबंधियों के यहां बिना निमंत्रण के भी पहुंचते हैं और उनके द्वारा प्रदान किया कव्या से परितृप्त होकर उन्हें अपने शुभ आशीर्वाद से परिपूर्ण करते हैं ।

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