रंग बिरंगे छातो संग बच्चो ने मचायी धूम,बताया गया छाता की महत्ता

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अमित मिश्रा

हेलो स्कूल में मनाया गया छाता दिवस

बारिश के बीच छातो संग एक्टीविटी रहा आकार्षण का केन्द्र

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में ओबरा नगर पंचायत के चोपन रोड स्थित हेलो स्कूल आफ एक्सीलेंश में छाता दिवस सेलिबे्रट किया गया। बच्चों ने रंग-बिरंगे छाते लेकर स्कूल आए और विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को छाते के महत्व और उपयोग के बारे में बताना है, खासकर बारिश व गर्मी के मौसम में। छाता दिवस समारोह में, बच्चों ने छातों के साथ विभिन्न खेल खेले, जैसे कि छाता दौड़ और छाता पेंटिंग। बच्चों ने छाते से जुड़ी कविताएँ और कहानियाँ भी सुनाईं। शिक्षकों ने छाते के उपयोग और बारिश और धूप से बचाने में इसकी भूमिका के बारे में बताया। बच्चों ने छातों के चित्रों में रंग भरकर और छातों की मिट्टी से कलाकृतियाँ बनाकर दिखाईं। रिमझिम बारिश के बीच छाते के साथ घूमना इस दिन का मुख्य आकर्षण रहा।

इस अवसर पर बच्चो को सम्बोधित करते हुये प्रधाचार्य नाहिद खान ने कहा कि अम्ब्रेला डे पर बच्चो ने मस्ती के साथ साथ अम्ब्रेला के बारे में विस्तार से बताया।

श्रीमती खान ने कहा कि अम्ब्रेला शब्द लैटिन शब्द अम्ब्रा से आया है, जिसका अर्थ है छाया या परछाई। ब्रॉली, छाते के लिए एक अपशब्द है, जिसका प्रयोग अक्सर ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में किया जाता है। बम्बरशूट, 19वीं सदी के उत्तरार्ध में छाते के लिए एक काल्पनिक अमेरिकी शब्द है। मूल छाते का आविष्कार चार हजार साल से भी पहले हुआ था। मिस्र, असीरिया, ग्रीस और चीन की प्राचीन कला और कलाकृतियों में छातों के प्रमाण मिलते हैं। हम चीनियों को सबसे पहले बारिश से बचाने का श्रेय दे सकते हैं। उनके कागज के छत्रों पर मोम की एक परत और फिर रोगन की परत चढ़ाई जाती थी जिससे छाते मौसम की मार झेल पाते थे।

छाते की पहली दुकानों में से एक, 1830 में लंदन, इंग्लैंड में 53 न्यू ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर खुली थी। जेम्स स्मिथ एंड संस द्वारा संचालित यह दुकान आज भी उसी स्थान पर नियमित समय पर चलती है। 1928 में, हंस हॉप्ट के पॉकेट छाते सामने आए। फिर, 1969 में, लवलैंड, ओहायो स्थित टोट्स इनकॉर्पोरेटेड के मालिक ब्रैडफोर्ड ई. फिलिप्स ने पहले काम करने वाले फोल्डिंग छाते का पेटेंट हासिल किया। छातों को 1880 से लेकर 1987 तक टोपी के रूप में भी इस्तेमाल किया गया है। कहा कि फोटोग्राफर कृत्रिम प्रकाश का उपयोग करते समय एक प्रसार उपकरण के रूप में तथा अधिकतर पोर्ट्रेट स्थितियों में चकाचैंध से बचाव और छाया के रूप में अंदर से परावर्तक युक्त छाते का उपयोग करते हैं। इसके पूर्व बच्चो ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर लोगो का मन मोह लिया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से शिक्षिका बाबी राय, पूनम गुप्ता, शादिया, शिफा फातिमा, अकाशिका पाण्डेय, प्रिया पाण्डेय, संयोेगिता आदि मौजूद रहे। समारोह का संचालन प्रबन्धक शमशाद आलम ने किया।

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