अमित मिश्रा
O – मनरेगा मजदूर भुखमरी के कगार पर, तत्काल भुगतान की मांग
सोनभद्र । एनएसयूआई कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय सचिव राघवेंद्र नारायण ने सोनभद्र जनपद में मनरेगा मजदूरों की बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दिसंबर माह से अब तक हजारों मजदूरों की मजदूरी का भुगतान लंबित है और वे भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।
राघवेंद्र नारायण ने कहा कि ये मजदूर हमारे गांवों की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार की बेरुखी और संवेदनहीनता ने उन्हें भूख और बेबसी के मुहाने पर ला खड़ा किया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना के तहत मजदूरी 237 रुपये प्रतिदिन तय है और हर परिवार को साल में 100 दिन काम की गारंटी दी जाती है, जो कांग्रेस शासनकाल की ऐतिहासिक योजना रही है।
काम मिला, पैसा नहीं मिला
उन्होंने खुलासा किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक औसतन केवल 50 दिन का ही काम मजदूरों को मिला है, वह भी बिना भुगतान के। सोनभद्र में कुल 32 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी का भुगतान बीते पांच महीनों से अटका हुआ है। इस कारण कई गांवों में चूल्हे ठंडे हैं, बच्चे भूख से बिलख रहे हैं और मजदूर कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
70 गांवों में ठप है काम
राघवेंद्र नारायण ने बताया कि जिले के 70 से ज्यादा गांवों में पिछले तीन महीनों से मनरेगा के कार्य ठप पड़े हैं। मजदूरी न मिलने के कारण मजदूरों ने काम करने से इनकार कर दिया है। “पहले पैसा दो, फिर काम करेंगे”—यही अब उनकी मांग है। उन्होंने कहा कि सरकार की असंवेदनशीलता ने ग्रामीण विकास की रफ्तार रोक दी है।
अधिकारियों व कर्मचारियों पर दोहरी मार
उन्होंने बताया कि प्रधानों, रोजगार सेवकों, सचिवों और तकनीकी सहायकों की स्थिति भी दयनीय हो गई है। एक ओर सरकार का काम पूरा कराने का दबाव है, दूसरी ओर मजदूरों का विरोध झेलना पड़ रहा है। गांवों में अधिकारी और प्रधान असहाय हो गए हैं, मजदूर उन्हें घेर लेते हैं और उनके पास कोई जवाब नहीं होता।
भाजपा पर मनरेगा विरोधी रवैये का आरोप
राघवेंद्र नारायण ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार का मजदूरों और मनरेगा योजना के प्रति रवैया सौतेला और शत्रुतापूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जहां 14.28 करोड़ ग्रामीण मजदूरों को रोज़गार का हक दिया, वहीं भाजपा सरकार इसे खत्म करने पर तुली है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2023-24 में यूपी में मनरेगा का बजट केवल 3.04% बढ़ा, जो देश में सबसे कम है, जबकि तमिलनाडु में यह 7.89% रहा। साथ ही 2022-23 में 5.53 करोड़ जॉब कार्ड हटाकर गरीबों का हक छीना गया।
15 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस
राघवेंद्र नारायण ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं हुआ, तो कांग्रेस पार्टी मजदूरों और कर्मचारियों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेगी और निर्णायक आंदोलन करेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार और संबंधित आयुक्त से अपील की है कि सोनभद्र के मजदूरों की 32 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया मजदूरी तत्काल चुकाई जाए, ताकि उनके परिवारों का जीवन पटरी पर लौट सके।







