आजादी के 75 साल बाद चौरा गांव को मिला अपनी जमीन का अधिकार

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रवि पाण्डेय / अमित मिश्रा

0 – चौरा गाँव में दूसरी बार पहुंचे जिलाधिकारी

सोनभद्र । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का चौरा गांव, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आजादी के बाद दूसरी बार किसी जिलाधिकारी के कदमों का साक्षी बना। बिहार सीमा से सटे इस सुदूर गांव में न तो कभी कोई बड़ा अधिकारी पहुंचा था और न ही किसी नेता या मंत्री ने यहाँ की सुध ली थी। लेकिन आज, 75 वर्षों बाद, जब जिलाधिकारी बी0 एन0 सिंह, सदर विधायक भूपेश चौबे, सपा सांसद छोटेलाल खरवार, समाज कल्याण अधिकारी रामाशंकर यादव, जिले का प्रशासनिक अमले के साथ गाँव पहुंचे, तो ग्रामीणों के चेहरे पर उम्मीद की नई किरण झलकने लगी। 

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर अपनी समस्याएं रखीं । इस दौरान वनवासियों को वनाधिकार के तहत 500 बीघा भूमि का पट्टा दिया गया, जिससे 127 परिवारों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना हक खतौनी मिला। अपने अधिकार प्रमाण पत्र पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। जिलाधिकारी ने कहा कि चौरा गांव चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, और यहां मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता विकास कार्यों में बड़ी बाधा बनती है। उनका पहला लक्ष्य यहां संचार सुविधा बहाल करना है, जिससे आवास, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास तेज़ी से हो सके।

जिलाधिकारी बी एन सिंह ने कहा की ग्राम चौरा व आस-पास गांव के ग्रामीणों को केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित किया जायेगा।

वन भूमि पर वर्षों से कृषि कर रहे लोगों को वनाधिकार अधिनियम के तहत खतौनी प्रमाण-पत्र किया गया खतौनी वितरण से ग्रामीणों को मिला मालिकाना हक, खुशी की लहर, सरकार के इस कार्य की ग्रामीणों ने कि सराहना।

सांसद छोटेलाल खरवार, विधायक सदर भूपेश चौबे व जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह ने आज मड़पा के राजस्व ग्राम चौरा में जन चौपाल लगाकर अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी, वन अधिकारों की मान्यता के अन्तर्गत पात्र 127 लाभार्थियों को खतौनी का वितरण किया गया। खतौनी वितरण से जनजाति कों वन अधिकारों के तहत कब्जे की वन भूमि पर उन्हें खतौनी द्वारा मालिकाना हक प्रदान किया गया है। इन ग्रामीणों द्वारा जिस भूमि की कई वर्षों से जोताई-बुवाई का कार्य किया जाता रहा है, लेकिन अभी तक इनको मालिकाना हक का कोई प्रमाण नहीं था, ग्रामीणों कों अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता था और सरकार की योजनाओं से सम्बन्धित लाभ नहीं मिल पा रहा था। काबिज भूमि की खतौनी का वितरण किया गया है।

सदर विधायक

जनचौपाल को सम्बोधित करते हुए विधायक सदर श्री भूपेश चौबे ने कहा कि प्रदेश के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ने कई वर्षों से जंगल में रह रहे वनवासियों के जन कल्याण के लिए उनके मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। इसी तरह से वनवासी समाज के लोगोे के लोगों द्वारा जिस जमीन पर कई वर्षों से जोत-कोड़ करते चले आ रहें हैं, उनके पास जमीन का कोई रिकार्ड नहीं था, जिससे उन्हें कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए इनके वनवासी समाज के भूमि पर उन्हीं का अधिकार हमेशा बना रहें, इसलिए खैतौनी का वितरण किया जा रहा है।

आदिवासीयों कों वन भूमि पर मालिकाना हक़ देने के लिए राज्यपाल का 2 बार और मुख्यमंत्री का जिले में 7 बार आगमन भी हुआ, जो जनपद के लिए सौभाग्य की बात है। वन निवासियों को  उनका अधिकार मिलें इस मकसद से राज्यपाल द्वारा राजभवन में 10 से 12 बार मीटिंग भी करायी।

सांसद छोटेलाल खरवार

सांसद श्री छोटे लाल खरवार ने कहा कि जोत-कोड़ के आधार पर काबिज हमारे वनवासियों को खतौनी के माध्यम से जो मालिकाना हक प्राप्त हो रहा है, इसके लिए हम सभी लोग सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और यह कार्य सराहनीय। सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों में वनाधिकार के तहत जो भी पट्टा व खतौनी का वितरण किया जाये उसे पारदर्शिता व निष्पक्षता के साथ किया जाये, जिससे भविष्य में वनवासियों को किसी प्रकार की समस्या न होने पायें।

सोनभद्र जिले के नगवां ब्लॉक में बसा चौरा गांव भौगोलिक दृष्टि से अनोखा है। यहाँ सूर्योदय एक घंटे देरी से और सूर्यास्त एक घंटे पहले हो जाता है, क्योंकि यह तीन ओर से ऊँची पहाड़ियों से घिरा हुआ है और एक ओर नदी बहती है। इस प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने इसे “विलेज टूरिज्म” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है, ताकि इसे पर्यटन मानचित्र पर लाया जा सके। 

सोनभद्र के कई दूरस्थ इलाकों में आज भी प्रशासन और सरकार की पहुंच नहीं हो पाई थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। चौरा गांव, जो कभी माओवादियों का गढ़ माना जाता था, वहाँ आज पहली बार जिलाधिकारी पहुंचे। यह वही इलाका है, जहां एक समय सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जाने से भी कतराते थे। 

जिलाधिकारी सोनभद्र

जिलाधिकारी बी0 एन0 सिंह ने कहा कि गाँव के विकास में सबसे बड़ी बाधा मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता है। इसे प्राथमिकता से दूर किया जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सके। वनाधिकार के तहत अपनी भूमि का मालिकाना हक पाकर ग्रामीणों ने खुशी जताई और कहा कि वर्षों से जिस जमीन को वे जोतते आ रहे थे, आज उसका कानूनी अधिकार खतौनी के रूप में उन्हें मिल गया। 

ग्रामीण दामोदर रमावती देवी, कलावती और रामजग ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उनके पूर्वज जंगल और बंजर भूमि पर खेती करते आए हैं, लेकिन अब तक वे मालिकाना हक से वंचित थे। पहले वन विभाग और लेखपाल भूमि पर कब्जा हटवा देते थे, लेकिन अब सरकार ने उन्हें असली हकदार बना दिया है। 

अंततः 127 परिवारों को 500 बीघा भूमि का मालिकाना हक मिल सका। 

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