अमित मिश्रा
O- 37 करोड़ का नाला बना नगरवासियों का दर्द, बारिश में घर-घर गंदे पानी का कहर
सोनभद्र । तेज़ बरसात ने रॉबर्ट्सगंज नगर पालिका की लापरवाही को फिर बेनकाब कर दिया है। शहर के मुख्य बाजार से लेकर गलियों तक 3 फीट ऊँचाई तक गंदे नाले का पानी भर गया। पानी इतना तेज़ी से आया कि घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और बरतन तक डूबकर खराब हो गए। कई घरों के लोग अपने ही घर में बैठकर “बाढ़ पीड़ित” बन गए, और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस गंदे पानी में फंसे रहे।

बरसात ने जहां किसानों के खेतों को पानी दिया, वहीं नगर पालिका ने शहरवासियों को “गंदगी का तोहफ़ा” दे दिया। जिस नाले के निर्माण का काम 5 साल पहले 22 करोड़ की लागत से शुरू हुआ था, उसकी कीमत अब बढ़कर 37 करोड़ हो गई है, लेकिन काम अभी भी अधूरा है। जनता को वादा मिला था, “जलभराव से मुक्ति” और नतीजा मिला है, “गली-गली गंदे पानी की दरिया”।
नगर के कई मोहल्लों में गंदे पानी के साथ नालों की बदबू और कीचड़ फैल गई है। घरों में खाने का सामान सड़ गया, कपड़े गंदे पानी में तैरने लगे, और कई जगह बिजली काटनी पड़ी क्योंकि पानी मीटर और स्विचबोर्ड तक पहुंच गया था। बच्चों को स्कूल जाना तो दूर, घर के दरवाज़े तक खुला रखना मुश्किल हो गया।
राजनीतिक दलों और संगठनों का गुस्सा फूटा

कांग्रेस नेत्री उषा चौबे ने कहा, यह नगर पालिका नहीं, भ्रष्टाचार का तालाब है। 37 करोड़ खर्च करने के बाद भी अगर जनता घर में नाव चलाए, तो समझ लीजिए पैसे जेब में और पानी घर में है।
सपा नेता प्रमोद यादव ने कटाक्ष किया,यह सरकार और नगर पालिका दोनों का विकास मॉडल है,सड़कें नदी, और घरों में तालाब। जनता को राहत नहीं, सिर्फ प्रचार मिला है।

बसपा जिलाध्यक्ष बी. सागर ने कहा,नाले का पैसा खा गए, अब जनता को गंदा पानी पिला रहे हैं। यह जनता के साथ सीधा धोखा है, और जिम्मेदारों पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।

व्यापार मंडल अध्यक्ष कौशल शर्मा ने नाराज़गी जताई, व्यापारियों के दुकानों में लाखों का माल खराब हो गया, और कोई अधिकारी पूछने तक नहीं आया। नगर पालिका ने व्यापारियों को कर्ज और गंदगी दोनों में डुबो दिया।

स्थानीय व्यापारी आक्रोशित हैं, दुकानों में रखा लाखों का माल खराब हो गया, और मुआवजे के नाम पर अब तक कोई आश्वासन भी नहीं। उधर, मोहल्ले के लोग कहते हैं, यह सिर्फ बारिश नहीं, नगर पालिका की नाकामी का जलप्रलय है।
नगर पालिका के चेयरमैन, अधिकारी और कर्मचारी इस हालात पर “लाचार” नज़र आए। उनका कहना है, “बारिश प्रकृति का काम है, हम कुछ नहीं कर सकते“, लेकिन सवाल यह है कि 37 करोड़ का बजट और 5 साल का समय आखिर कहां गया? ठेकेदार और अफसरों के बीच फाइलों में घूमता नाले का काम, बरसात में शहर को डुबो रहा है।

शहर में यह चर्चा अब गर्म है कि बरसात के बाद आने वाला चुनाव नगर पालिका के लिए किसी तूफान से कम नहीं होगा, नाला हीं बनेगा बड़ा मुद्दा । फिलहाल, रॉबर्ट्सगंज में गंदे नाले का पानी लोगों के धैर्य और उम्मीद दोनों को बहा ले गया है।







