सोनभद्र परिवहन विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप, पूर्व जिलाध्यक्ष ने एआरटीओ से की मुलाकात

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बोले- लाइसेंस से रजिस्ट्रेशन तक घूसखोरी, 500 रजिस्ट्रेशन 6 माह से पेंडिंग

सोनभद्र। परिवहन विभाग एक बार फिर चर्चाओं में है। गाड़ी रजिस्ट्रेशन से लेकर डीएल बनवाने में बड़ी अनियमितता और मनमानी वसूली के आरोप लगे हैं। पीपीपी मॉडल पर संचालित एटीएस सेंटर, मोटर ट्रेनिंग स्कूल और वाहन फिटनेस जांच प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
सोमवार को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी एआरटीओ कार्यालय पहुंचे और एआरटीओ से मुलाकात कर कार्यशैली में सुधार की मांग की। उन्होंने कार्यालय में धन उगाही का आरोप लगाया।
धर्मवीर तिवारी ने कहा कि शासन की मंशा के विपरीत काम कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। यहां बिना घूस के कोई काम नहीं हो रहा। ड्राइविंग लाइसेंस के नाम पर ट्रेनिंग सेंटर खुलेआम घूस ले रहे हैं। शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही। दूर-दराज से आने वाले लोगों को बार-बार परेशान किया जा रहा है ताकि मजबूरी में घूस दें।
उन्होंने आरोप लगाया कि ड्राइविंग टेस्ट पास होने के बाद भी सर्टिफिकेट और आरटीओ अप्रूवल के नाम पर घूस ली जा रही है। यह सब आरटीओ के संरक्षण में हो रहा है। कई एजेंसियों के 6 माह से रजिस्ट्रेशन नहीं दिए गए हैं। लगभग 500 रजिस्ट्रेशन पेंडिंग हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने बताया कि वाहन स्वामी यदि अपना रिफ्लेक्टर लेकर कार्यालय जाता है तो उसे मान्य नहीं किया जाता। फिटनेस सेंटर से ऊंचे दाम पर रिफ्लेक्टर लाने पर ही मान्य किया जाता है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। कहा कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो आमजन का सरकारी तंत्र से विश्वास कमजोर होगा, जिसका असर शासन की छवि पर पड़ेगा।
इस दौरान सत्येंद्र आर्य, लालू प्रजापति, आनंद मिश्रा, योगेश सिंह, आशु विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।

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