संवाददाता – सी एस पाण्डेय
पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्य पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, मानकविहीन ईंट-बालू और कम सीमेंट के इस्तेमाल का दावा, जांच की उठी मांग
बभनी (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में छत्तीसगढ़ सीमा से सटे आसनडीह क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे स्वागत द्वार के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने बुधवार को मौके पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और विभागीय उच्चाधिकारियों से निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने तथा मानकों के अनुरूप काम सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वागत द्वार के निर्माण में मानक के अनुरूप ईंट और बालू का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही सीमेंट की मात्रा भी कथित तौर पर कम रखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई, तो इससे स्वागत द्वार की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
निर्माण स्थल पर प्रदर्शन, अधिकारियों से कार्रवाई की मांग
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर नाराज ग्रामीणों ने मौके पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में जय कुमार, संदीप, श्यामदेव, लौटन, आयुष, शंभू, हरिकिशुन और राहुल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जांच के बाद सामने आएगी निर्माण की वास्तविक स्थिति
लाखों रुपये की लागत से तैयार हो रहे स्वागत द्वार की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों से निर्माण स्थल का निरीक्षण कराने, इस्तेमाल की जा रही सामग्री के नमूनों की तकनीकी जांच कराने तथा निर्माण की लागत और स्वीकृत मानकों के अनुरूप काम की पुष्टि करने की मांग की है।
फिलहाल, निर्माण में अनियमितता और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विभागीय जांच और तकनीकी रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।









