अमित मिश्रा
O- सोनभद्र से उठी आत्मनिर्भर पंचायत की मिसाल
सोनभद्र। स्थानीय शासन को मज़बूत बनाने और आत्मनिर्भर पंचायत के विज़न को साकार करने के लिए जनपद सोनभद्र में एक अनूठी पहल शुरू की गई है। उप निदेशक (पंचायत), विंध्याचल मंडल मिर्जापुर के निर्देशन में “पंचायतों के स्वयं के स्रोत से आय” विषय पर एक दिवसीय अनावासीय प्रशिक्षण का आयोजन डीपीआरसी भवन, सोनभद्र में किया गया।
इस प्रशिक्षण में जनपद के सभी विकासखंडों से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों के चयनित प्रधानों और सचिवों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन अलग-अलग बैचों में संपन्न कराया गया, ताकि हर प्रतिभागी को विषय की गहराई से जानकारी दी जा सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिला पंचायत राज अधिकारी श्री राजेश कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा,
“ग्राम पंचायतें देश के विकास की आधारशिला हैं। राज्य व केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि सीमित होती है, इसलिए पंचायतों को अपने स्वयं के स्रोतों से आय बढ़ानी होगी। तभी वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने में स्वतंत्र होंगी।”
उन्होंने बताया कि यदि किसी पंचायत की आबादी 1500 से कम है और वह स्वयं के स्रोतों से ₹10,000 तक की आय अर्जित करती है, तो सरकार द्वारा ₹50,000 तक का प्रोत्साहन “आत्मनिर्भर पंचायत पुरस्कार” के अंतर्गत दिया जाता है। इसी प्रकार, ₹10,000 से अधिक की आय करने वाली पंचायतों को उनकी आय का पाँच गुना प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों ने OSR (Own Source Revenue) के सभी बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
- प्रथम बैच में प्रशिक्षक रहे रोहित तिवारी और करुणा पाठक।
- द्वितीय बैच में वंदना श्रीवास्तव और सुरेन्द्र गुप्ता ने मार्गदर्शन दिया।
- तृतीय बैच में संदीप कश्यप और अंजली पांडेय ने प्रशिक्षण दिया।
पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ फैकल्टी श्री राजेश त्रिपाठी ने किया।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से ग्राम पंचायतों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे अपने गाँवों की ज़रूरतों के अनुसार योजनाएँ तैयार कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।







