नही रहे ठुमरी सम्राट पण्डित छन्नूलाल मिश्रा, संगीत प्रेमियो में शोक की लहर

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राजन

मीरजापुर(उत्तर प्रदेश)। पण्डित छन्नुलाल मिश्रा का हुआ निधन

नहीं रहे पद्म भूषण व पद्म विभूषण से सम्मानित, ठुमरी सम्राट पंडित छन्नूलाल मिश्र आज सुबह भोर में उन्होंने मीरजापुर में ली अंतिम सांस,

कुछ दिनों से स्वास्थ्य ठीक नहीं था वाराणसी में इलाज चल रहा था और 2 दिन पहले ही अपनी बेटी के घर मीरजापुर आए थे ।

निधन की खबर से संगीत प्रेमियों में शोक की लहर संगीत के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति ।

निधन की खबर से उनके निवास पर लोगों का लगा तांता वाराणसी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार , परिजनों ने दी जानकारी ।

“प्रारंभिक जीवन और शिक्षा”

पंडित छन्नुलाल मिश्रा का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के एक गाँव में हुआ था।

उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर बनारस में संगीत की विधिवत शिक्षा ली।

वहाँ उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खाँ से संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की।

“योगदान और कला”

मिश्रा जी बनारस घराने की गायकी, विशेषकर ख्याल और पूरब अंग की ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे।

उनकी प्रस्तुतियाँ भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई।

वे पूरब अंग की ठुमरी के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं और अनेक संगीत एल्बम जारी कर चुके थे।

वे आकाशवाणी (AIR) और दूरदर्शन के शीर्ष ग्रेड कलाकार रहे।

“पुरस्कार और सम्मान”

पंडित छन्नुलाल मिश्र को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया।

वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी अलंकृत किए गए थे।

“अन्य महत्वपूर्ण तथ्य”

पंडित जी के परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद की खबरें भी समय-समय पर चर्चा में रही थीं।

विवादों के बाद उन्होंने बनारस छोड़ दिया और अपनी बेटी नम्रता के साथ मिर्ज़ापुर में रहने लगे थे।

इसकी जानकारी टेलीफ़ोन से उनकी बेटी
नम्रता मिश्रा ने दी।

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