मौत के मुहाने से वापस लाई ज़िंदगी युवक ने दिखाई बेमिसाल बहादुरी, बचाई महिला की जान

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अमित मिश्रा

O- 50 फीट ऊंचाई से नदी में छलांग, अंधेरे में इंसानियत की जीत

O- सोन पम्प कैनाल में डूबती महिला को बचाने वाला बबलू बना देश के लिए मिसाल

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) । सोनभद्र जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और मानवता की जीवंत मिसाल बन गई है। घरेलू प्रताड़ना से मानसिक रूप से टूट चुकी एक महिला ने अपने मासूम बच्चे के सामने नदी में छलांग लगा दी, लेकिन बिजली विभाग के एक कर्मचारी की असाधारण बहादुरी ने मौत को मात दे दी।

रात 11:30 बजे का खौफनाक घटनाक्रम

01 अप्रैल 2026 की रात करीब 11:30 बजे चुर्क क्षेत्र स्थित सोन पम्प-1 के पास गीता देवी (पत्नी अनिल यादव) का अपने पति से विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद और प्रताड़ना से आहत होकर गीता देवी अपने तीन वर्षीय बच्चे के साथ सोन पम्प कैनाल पहुंचीं और लगभग 50 फीट ऊंचाई से घाघरा नदी में छलांग लगा दी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पति मौके पर मौजूद रहा, बच्चे को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन महिला नदी के तेज बहाव में डूबने लगी।

रोते बच्चे की आवाज बनी ज़िंदगी की पुकार

उसी समय सोन पम्प-1 पावर हाउस पर बिजली विभाग का अनुरक्षण कार्य चल रहा था।
रात के सन्नाटे में अचानक एक बच्चे के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनाई दी।

मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी जब घटनास्थल की ओर दौड़े, तो देखा कि एक व्यक्ति बच्चे को गोद में लिए खड़ा है, जबकि महिला नदी में जिंदगी और मौत से जूझ रही थी।

50 फीट नीचे अंधेरे में कूद गया बबलू

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए SDO रॉबर्ट्सगंज के ड्राइवर बबलू कुमार ने बिना समय गंवाए, अंधेरे में करीब 50 फीट ऊंचाई से सीधे नदी में छलांग लगा दी।

तेज बहाव, अंधेरा और जानलेवा हालात, लेकिन बबलू ने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष करते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

अवर अभियंता प्रदीप गुप्ता का बयान

मौके पर मौजूद अवर अभियंता प्रदीप गुप्ता ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा:

“हम सोन पम्प-1 पर अनुरक्षण कार्य के दौरान मौजूद थे। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अचानक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। जब मौके पर पहुंचे तो देखा कि महिला नदी में डूब रही थी, पति किनारे खड़ा था और बच्चा रो रहा था।

स्थिति बेहद गंभीर थी। उसी समय हमारे ड्राइवर बबलू ने बिना देर किए नदी में छलांग लगाई और महिला की जान बचा ली। यह साहस और कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है।”

अधिशाषी अभियंता ओ. पी. गुप्ता का आधिकारिक बयान

इस पूरे घटनाक्रम पर अधिशाषी अभियंता (वितरण खंड) ओ. पी. गुप्ता ने कहा:

“हमारे अधिकारी सोन पम्प सब स्टेशन पर अनुरक्षण कार्य कर रहे थे। रात लगभग 12 बजे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। जब कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक महिला नदी में डूब रही थी, उसका पति किनारे पर खड़ा था और बच्चा रो रहा था।

ऐसी स्थिति में सहायक अभियंता के ड्राइवर बबलू ने रात के अंधेरे में अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाकर महिला की जान बचाई। यह अत्यंत साहसिक और सराहनीय कार्य है।

इस बहादुरी की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है और बबलू को निश्चित रूप से सम्मानित व पुरस्कृत किया जाएगा।”

जान बचाने वाले बबलू कुमार का बयान

अपनी बहादुरी पर बबलू कुमार ने विनम्रता से कहा:

“मैंने सिर्फ बच्चे की चीख सुनी और देखा कि उसकी मां डूब रही है। उस समय कुछ सोचने का मौका नहीं था। बस यही लगा कि अगर देर हुई तो जान चली जाएगी। इसलिए बिना सोचे नदी में कूद गया। भगवान की कृपा से महिला को बचा पाया।”

पुलिस ने लिया संज्ञान

सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
महिला को प्राथमिक उपचार के बाद पुलिस संरक्षण में लिया गया।
पति-पत्नी दोनों से पूछताछ जारी है और घरेलू प्रताड़ना के आरोपों की जांच की जा रही है।

देशभर में उठी मांग, बबलू को मिले पुरस्कार

इस घटना के बाद स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक यह मांग उठ रही है कि,

50 फीट ऊंचाई से अंधेरे में छलांग लगाकर एक महिला की जान बचाने वाले बबलू कुमार को
राज्य या राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए।

क्योंकि ऐसे लोग सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज के सच्चे नायक होते हैं।

यह घटना जहां घरेलू हिंसा की भयावह सच्चाई को उजागर करती है,
वहीं बबलू कुमार का साहस यह भरोसा दिलाता है कि आज भी इंसानियत ज़िंदा है।

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