एक दिन में उजड़ गया घर का भविष्य: सोनभद्र के कोन में सगे भाई-बहन की मौत से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

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नवीन कुमार

O- तीन माह पहले नसबंदी, अब दोनों संतानें मृत,

O- ठंड, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी दावों की खुली पोल

कोन (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कोन थाना क्षेत्र अंतर्गत गिधिया गांव से सामने आई यह घटना सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का शोकपत्र बन चुकी है। एक ही दिन में सगे भाई-बहन की मौत ने न केवल एक घर का उजाला बुझा दिया, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं, ठंड से बचाव के इंतजाम और ग्रामीण इलाकों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंगलवार को गिधिया गांव निवासी विकास कुशवाहा के तीन माह के नवजात पुत्र अंशु की सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। उल्टी शुरू होते ही परिजन उसे कोन के एक निजी चिकित्सालय लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। परिजन जब शव लेकर घर लौटे, तब तक मातम का दूसरा अध्याय शुरू हो चुका था।

कुछ ही घंटों बाद विकास कुशवाहा की चार वर्षीय पुत्री अनन्या को भी उल्टियां होने लगीं। परिजन अभी मासूम बेटे के अंतिम संस्कार की तैयारी में ही जुटे थे। आनन-फानन में बच्ची को निजी साधन से कोन ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला चिकित्सालय पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया। परिजन की उम्मीदें तब पूरी तरह टूट गईं, जब मुख्यालय के एक निजी अस्पताल ने भी बच्ची को डेड ऑन अराइवल बताया।

एक ही दिन में दोनों बच्चों की मौत ने पूरे गांव को सन्न कर दिया। यह पीड़ा इसलिए भी असहनीय है क्योंकि यही विकास कुशवाहा की इकलौती संतानें थीं। तीन माह पूर्व दूसरे बच्चे के जन्म के समय उनकी पत्नी की नसबंदी कर दी गई थी। आज वही परिवार निःसंतान होकर टूट चुका है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कड़ाके की ठंड और समुचित इलाज के अभाव में दोनों बच्चों की हालत बिगड़ी। गांव में न तो ठंड से बचाव की कोई ठोस व्यवस्था है और न ही आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधा। वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन गांव में आक्रोश साफ झलक रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। ओबरा उपजिलाधिकारी विवेक कुमार, खंड विकास अधिकारी डॉ. जितेंद्र नाथ दुबे, लेखपाल अजय कुमार मौके पर पहुंचे। थाना निरीक्षक संजीव सिंह ने परिजनों से तहरीर लेकर दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा।

परिवार की आर्थिक हालत बेहद दयनीय है। बच्चों के पिता विकास कुशवाहा रोज़गार के सिलसिले में करीब 15 दिन पहले रायपुर गए हुए थे। एक के बाद एक मिली मौत की खबर ने उन्हें बदहवास कर दिया। वहीं, दोनों बच्चों की मौत से सदमे में आई मां की हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे मायके भेज दिया है।

आज गिधिया गांव में सन्नाटा है। हर आंख नम है और हर जुबान पर एक ही सवाल?
क्या ठंड से बचाव, प्राथमिक स्वास्थ्य और सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है, लेकिन यह त्रासदी प्रदेश सरकार के उन तमाम दावों को कठघरे में खड़ा करती है, जिनमें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण सुरक्षा की बात की जाती है।

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