सोनभद्र।
जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में जिलाध्यक्ष रामराज गोड़ ने कहा कि 20 वर्ष पूर्व यूपीए-1 सरकार के दौरान लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने ग्रामीण गरीबों को काम का अधिकार देकर नई सामाजिक सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार ने पंचायतों को सशक्त करते हुए गांव स्तर पर विकास कार्यों के निर्णय का अधिकार दिया, जिससे पंचायती राज व्यवस्था मजबूत हुई। कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा साबित हुई।
रामराज गोड़ ने आरोप लगाया कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार इस कानून को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
उन्होंने बताया कि तीन जनवरी से पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाया जा रहा है। गांधीवादी तरीके से किए जा रहे इस आंदोलन के तहत प्रदेश में पांच हजार से अधिक चौपालों का आयोजन किया गया है। 13 फरवरी को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पदयात्राएं भी निकाली गईं।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन का दूसरा चरण 17 फरवरी से शुरू होगा। इस दिन लखनऊ में विधानसभा घेराव कर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा में बदलाव कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है और राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालने का प्रयास कर रही है, जो संघीय ढांचे के लिए भी ठीक नहीं है।
रामराज गोड़ ने कार्यकर्ताओं से 17 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुंचने की अपील की। इस अवसर पर शहर अध्यक्ष फरीद खां और आरटीआई अध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।






