संवाददाता लकी केशरी
चंदौली । जिले के तहसील नौगढ़ के तेंदुआ गांव में 22 साल पहले बसपा के वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता बसंत लाल की नक्सलियों द्वारा हत्या कर दी गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को जमीन का पट्टा और सरकारी योजनाओं में संतृप्त करने का वादा किया था, लेकिन दो दशकों बाद भी यह वादा अधूरा है।

बसंत लाल की विधवा शांति आज भी अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रही है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने भी जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। शांति ने बताया कि 22 साल से वे अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कभी भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस मामले में जिले के 15 जिलाधिकारी बदल गए, लेकिन शांति की समस्या अभी भी अनसुलझी है। शांति ने बताया कि प्रशासन ने वादा किया था कि उनके परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, लेकिन अब तक ना तो उन्हें आवास मिला और नहीं अन्य सुविधाएं।







