आर्यभट्ट जयंती पर देशभर में नमन, शून्य और खगोलीय ज्ञान के जनक को श्रद्धांजलि

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रवि पाण्डेय/अमित पाण्डेय

O- विश्व को गणित और खगोल विज्ञान की नई दिशा देने वाले महान वैज्ञानिक को याद कर रहा देश

सोनभद्र। आज महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जा रहा है।

आर्यभट्ट को आधुनिक गणित और खगोल विज्ञान का अग्रदूत माना जाता है, जिन्होंने शून्य (0) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाकर पूरी दुनिया को नई दिशा दी। उनके द्वारा दिए गए सिद्धांत आज भी विज्ञान और गणित की नींव माने जाते हैं।

दुनिया को दिया अमूल्य ज्ञान

आर्यभट्ट ने न केवल गणित बल्कि खगोल विज्ञान में भी क्रांतिकारी योगदान दिया।

  • पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) का सिद्धांत प्रस्तुत किया
  • ग्रहों की गति और सूर्य-चंद्र ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या दी
  • गणितीय सूत्रों और त्रिकोणमिति के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

वैश्विक स्तर पर सम्मान

फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में भी आर्यभट्ट की प्रतिमा स्थापित है, जो उनके वैश्विक महत्व और भारत की वैज्ञानिक विरासत का प्रतीक है।

श्रद्धांजलि संदेश

“जिस शून्य के बिना सब कुछ शून्य है, उस महान ज्ञान के जनक आर्यभट्ट को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन और बारंबार प्रणाम।”

आर्यभट्ट का जीवन और उनके सिद्धांत आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा हैं। उनका योगदान भारत की वैज्ञानिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित करता है।

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