अमित मिश्रा
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतें, लेकिन अधिकारियों की नींद नहीं टूटी
वैनी (सोनभद्र) । नगवां ब्लॉक में शिक्षा का कारोबार अब धंधे में बदल चुका है। बिना मान्यता वाले आधा दर्जन से अधिक विद्यालय इंटर तक की पढ़ाई कर रहे हैं और शिक्षा विभाग ‘कुंभकर्णी निद्रा’ में लीन है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतें भी हुईं, नोटिस भी निकले, लेकिन कार्रवाई? वह अब तक सरकारी फाइलों में धूल खा रही है।

‘जुगाड़’ है तो स्कूल चलाओ!
खलियारी स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल की मान्यता सिर्फ कक्षा पाँच तक है, मगर बोर्ड बदलकर ‘कैमूर मंजरी हाईस्कूल’ का तमगा लगा दिया गया और इंटर तक की कक्षाएं धड़ल्ले से चलने लगीं। इतना ही नहीं, जर्जर भवन को दिखाकर उसमें नया आवासीय विद्यालय भी खोल दिया गया। लगता है अब मान्यता नहीं, बल्कि ‘जुगाड़’ ही शिक्षा की नई पहचान बन गई है।
जांच बनी ‘कॉमेडी शो’
तेनूआ के बृजेश कुमार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। जिलाधिकारी ने जांच का जिम्मा जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपा, मगर साहब ने खुद झंझट न पालते हुए इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य को थमा दिया। जांच अधिकारी अवैध विद्यालयों में गए ही नहीं, शिकायतकर्ता से बात भी नहीं की। उल्टा, एक वैध कॉलेज के संचालक को धमका आए और रिपोर्ट में लिख दिया कि सभी अवैध स्कूल बंद कर दिए गए हैं, क्या शानदार जांच है, बिना देखे, बिना पूछे, सीधा फर्जी आख्या।
पत्रकार पर ही जांच की धमकी
जब पत्रकार विजय शंकर पांडे ने जिला विद्यालय निरीक्षक से सवाल किया, तो अधिकारी बौखला उठे। टालमटोल तो किया ही, उल्टे पत्रकार पर ही जांच बिठाने की धमकी दे डाली। यानी सच्चाई उजागर करने पर सवाल उठाने वाला ही दोषी ठहराया जाएगा? यही है विभाग की पारदर्शिता!
जीरो टॉलरेंस या जीरो एक्शन?
प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, मगर नगवां में यह नीति सिर्फ भाषणों और फाइलों तक सीमित है। यहां बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ हो रहा है, गरीब अभिभावकों की जेबें काटी जा रही हैं और शिक्षा विभाग ठस्स खड़ा तमाशा देख रहा है।

आखिर संरक्षक कौन?
सवाल उठता है—आखिर इन अवैध विद्यालयों का संरक्षक कौन है? किस सफेदपोश नेता की छत्रछाया में ये सब खेल हो रहा है? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो और फर्जी आख्या लगाने वाले अफसरों से लेकर अवैध स्कूल संचालकों तक, सब पर कड़ी कार्रवाई हो। वरना यह मान लेना होगा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ा ‘सिलेबस’ है।







