श्रीराम कथा के सातवें दिन हुआ केवट और सीता हरण प्रसंग

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अमित मिश्रा

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। सदर विकास खण्ड के ग्राम तरावां स्थित शिव मंदिर पर चल रहे श्री रामचरितमानस में नवाह पाठ महायज्ञ एवं श्री राम कथा के सातवें दिन कथावाचिका मानस माधुरी सुनीता पाण्डेय ने केवट प्रसंग एवं रावण द्वारा छल पूर्वक माता सीता के हरण के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।

उन्होंने कहा कि भगवान राम गंगा के तट पर पहुंचते हैं और गंगा नदी को पार करने के लिए निषाद राज केवट से नाव की मांग करते हैं परंतु केवट अपने नाव लाने से मना करता है क्योंकि वह जानता है कि भगवान राम परम ब्रह्म है और उसके पास मौका है कि वह परम ब्रह्म की छू सके इसी कारण वह हठ पूर्वक उनके चरण धोने की बात करता है और अंत में कठौता में वह भगवान श्री राम के चरण को धोता है तथा भगवान श्री राम व लक्ष्मण एवं माता सीता को नव द्वारा गंगा पार करता है और भगवान श्री राम चित्रकूट पहुंचते हैं वहां वह माता सीता का अपने हाथों सुनकर ले गए फूलों का गजरा बनाकर श्रृंगार करते हैं क्योंकि स्त्रियों के खुले कैसे विनाश के कारण होते हैं और माता-पिता के सिंगर के उपरांत उन्हें अग्नि मैं निवास कराते हैं और कहते हैं
” सुनहुँ प्राणप्रिय परम् सुशीला,
मैं कछू करब नरसी नर लीला l
तुम पावक मह करऊ निवासा,
जो रघुवर निशाचर नासा ll
माता सीता को अग्नि में प्रवेश कराकर भगवान श्री राम माया रुपी सीता के साथ हो गए रावण की बहन सूपणखा युवकों को देखती है तो वह अपना सुंदर रूप बनाकर उनसे विवाह का प्रस्ताव रखती है भगवान राम द्वारा स्वयं को विवाहित बताकर सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास जाने को कहते हैं और बार-बार उन दोनों द्वारा एक दूसरे के पास भेजे जाने पर वह क्रोधित होकर अपने राक्षसी भेष में आती है और माता सीता के ऊपर आक्रमण करने का प्रयास करती है भगवान श्री राम का इशारा पाकर लक्ष्मण जी उसके नाक और कान काट देते हैं इसके उपरांत वह अपने भाई लंका के राजा रावण के पास जाती है और उनसे गीता की सुंदरता और अपने अपमान के बारे में बताती है इस पर रावण अपने मामा मरीज के पास जाता है और उन्हें जबरदस्ती सोने के हिरण के रूप में माता सीता के पास पर्णकुटी जाने को कहता है माता सीता सोने का सुंदर हिरण देखकर उसकी चल लाने का आग्रह करती हैं जिस पर भगवान श्री राम सोने की मृग के पीछे चले जाते हैं और सोने का मायावी लक्ष्मण से मदद यह अपील करता है और लक्ष्मण जी माता सीता के निर्देशानुसार लक्ष्मण रेखा खींचकर भगवान श्री राम की सहायता है चले जाते हैं उधर रावण ब्राह्मण का नकली बेस बनाकर भिक्षा के उद्देश्य आता है और माता सीता का हरण कर लंका ले जाता हैl

इस अवसर पर अरविंद पाण्डेय, कृष्णा तिवारी, सुशील देव, उमेश देव, नीधू प्रसाद , भोला देव, आकाश देव, धनीशंकर देव, अभिषेक देव, मुन्ना विश्वकर्मा, श्रीनाथ विश्वकर्मा, मन्नू शर्मा , महेश पासवान, जिला जीत, मनोज पाण्डेय व समीर समेत आसपास के ग्रामीण उपस्थित रहेl

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