महिलाओं के साथ पुरुषों को भी जागरूक होना जरूरी: डॉ. बबीता सिंह चौहान

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अमित मिश्रा

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। डॉ. बबिता सिंह चौहान ने मंगलवार को सोनभद्र जिले का दौरा कर महिलाओं से जुड़े मामलों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पीड़ित महिलाओं की समस्याएं सुनीं और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर महिला सुरक्षा और जागरूकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ होने वाली कई घटनाएं बाहरी नहीं बल्कि परिवार के भीतर की परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं, इसलिए केवल महिलाओं ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी जागरूक और संवेदनशील बनने की जरूरत है

उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष समाज के दो पहिए हैं और परिवार, समाज तथा देश का संतुलित विकास तभी संभव है जब दोनों समान रूप से जिम्मेदारी निभाएं।

बच्चों में बढ़ते मोबाइल एडिक्शन पर जताई चिंता

डॉ. चौहान ने बच्चों में तेजी से बढ़ रहे मोबाइल एडिक्शन को भी गंभीर सामाजिक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि कक्षा पांच तक के बच्चों को मोबाइल फोन न देने और स्कूलों द्वारा मोबाइल के माध्यम से होमवर्क न दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों को इस लत से बचाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल का बच्चों की याददाश्त और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी रखी राय

महिलाओं की नसबंदी पुरुष डॉक्टरों द्वारा किए जाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टर का पेशा अत्यंत सम्मानजनक होता है, इसलिए इसे निजी संस्थानों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ महिलाओं के शोषण या ब्लैकमेल जैसी शिकायतें सामने नहीं आतीं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ निजी स्थानों जैसे जिम और ब्यूटी पार्लर में महिलाओं के साथ ब्लैकमेलिंग, शोषण और हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि जहां महिलाओं को सेवाएं प्रदान की जाती हैं, वहां महिलाओं द्वारा ही सेवाएं देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

समितियों के कार्यों की होगी समीक्षा

जिले में महिला सुरक्षा से जुड़ी समितियों के कामकाज पर उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थाओं की समितियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन समय-समय पर समीक्षा जरूरी है, ताकि व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।

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