वरदान के बदले भगवान राम को 14 बरस का बनवास और भरत को राजगद्दी देने का वचन देते है।

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अमित मिश्रा

सोनभद्र । रावटसगंज तहसील के ग्राम तरावा में शिव मंदिर रामस्वरूप तालाब पर चल रही यज्ञ एवं राम कथा के छठे दिन कथा वाटिका मानस माधुरी सुनीता पांडे ने माता सीता की विवाह के उपरांत विदाई एवं भगवान श्री राम के वन गमन की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया उन्होंने कहा कि माता सीता की मां सुनैना ने बड़े भारी एवं बोझिल मन से माता सीता एवं चारों बहनों को भगवान श्री राम तथा उनके चारों भाइयों के साथ विदा किया अभी माता सीता को अयोध्या में कुछ दिन ही बीते थे की राजा दशरथ ने दरबार में शीशे में अपना चेहरा देखा अपने कान के पास के बाल सफेद दिखाई दिए!
श्रवण समीप भये शीत केशा।
मनहू जठरपन की अनवेशा।।
दशरथ जी ने सोचा कि अब हमें अपना राज पाट अपने उत्तराधिकारी सौंप देना चाहिए यह सोचकर उन्होंने भगवान श्री राम के राज्याभिषेक कि तैयारी शुरू कर दी उनके इस निर्णय के बाद संपूर्ण अयोध्या को सजाया जाने लगा अयोध्या की सजना की खबर जब मंथरा को लगी तब उसने अयोध्या के सजाने का कारण पता किया और माता कैकई को उकसाने लगी कि यदि राम राजा बन गए तो वह दासी के समान हो जाएगी इस पर कैकई ने मंथरा को फटकार लगाई क्योंकि कैकई भगवान राम के राज्याभिषेक की खबर सुनकर अति प्रसन्न थी परंतु मंथारा द्वारा लगातार कान भरे जाने के उपरांत विचार करते समय माता कैकई को भगवान राम को वॉल्यकाल दिया गया वरदान याद आता है जो भगवान श्री राम ने उनसे मांगा था इस समय पढ़ने पर किसी भी परिस्थिति में उन्हें उनके साथ देना होगा इसके उपरांत माता कैकई स्वयं को निष्ठुर बना लेती है और कोप भवन में चली जाती है जब राजा दशरथ को माता कैकई के को भवन में जाने के बारे में पता लगता है तो वह उनके समीप कोपभवन में जाते हैं और माता कैकई को समझने का प्रयास करते हैं परंतु काफी प्रयास के बाद जब वह नहीं मानती तब राजा दशरथ माता कैकई को अपने पूर्व में दिए गए दो वरदान के बदले प्रथम वरदान के रूप में भगवान राम को 14 बरस का बनवास और दूसरे वरदान के रूप में भारत को राजगद्दी देने का वचन देते हैं राजा द्वारा दिए गए वचन की जानकारी होने पर भगवान श्री राम अपने माताओ व पिता से मिलकर बन के लिए चल देते हैं भगवान राम के साथ उनके प्रेम में पागल अयोध्या की जनता उनके साथ चलने लगती है और तमसा नदी पर रात्रि विश्राम के समय भगवान श्री राम अयोध्या निवासियों को सोते हुए छोड़कर एवं भ्रमित कर सुमंत जी के साथ आगे चले जाते हैं l
इस अवसर पर अरविंद पांडे, कृष्ण प्रसाद तिवारी, उमेश देव, आकाश देव,, सुभाष शर्मा, राम विश्वकर्मा, मुन्ना हरिजन, परोरा पासवान, धनी शंकर देव, धनंजय देव, हरिओम देव, उदय केसरी, पारस केसरी समेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे

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