विंध्य की सभ्यता से आधुनिकता तक: ‘सोनभद्र का इतिहास’ को मिला नया आधार

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अमित मिश्रा

O- बसंत पंचमी पर इतिहास का पुनर्पाठ: ‘सोनभद्र का इतिहास’ ग्रंथ का भव्य लोकार्पण

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर विंध्य क्षेत्र के इतिहास को एक सशक्त दस्तावेज़ी स्वरूप मिला, जब प्रख्यात इतिहासकार डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ द्वारा लिखित शोधग्रंथ ‘सोनभद्र का इतिहास’ का भव्य लोकार्पण रॉबर्ट्सगंज स्थित होटल डीआर ड्रीम्स लग्ज़री बैंक्वेट में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन श्रीरघुनाथ-मंदिर देवगढ़ तीर्थक्षेत्र न्यास के तत्वावधान में आयोजित किया गया।

सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीपप्रज्ज्वलन के साथ प्रारम्भ हुए समारोह की अध्यक्षता पद्मश्री पूर्व कुलपति अभिराजराजेन्द्र मिश्र ने की। मुख्य अतिथि ओडिशा के पूर्व डीडीपी महामहोपाध्याय अरुणकुमार उपाध्याय रहे। कार्यक्रम में प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति और साहित्य जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की सहभागिता रही।

इतिहास की मौन साक्षियों को स्वर मिला: जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह

ग्रंथ के संपादक एवं सोनभद्र के जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा-

“सोनभद्र केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के विकास का जीवंत साक्षी है। सलखन के जीवाश्म, अगोरी, विजयगढ़, शिवद्वार और नलराजा जैसे स्थलों का इतिहास भारत की प्राचीन सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है। डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ ने इस ग्रंथ के माध्यम से सोनभद्र के इतिहास से जुड़े एक बड़े अकादमिक अभाव की पूर्ति की है।”

उन्होंने इसे शोधार्थियों, प्रशासकों और भावी पीढ़ी के लिए एक संदर्भ ग्रंथ बताया।

यह केवल इतिहास नहीं, सांस्कृतिक आत्मबोध का प्रयास : लेखक डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’

ग्रंथकार डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ ने कहा

“इतिहास केवल अतीत का वर्णन नहीं, बल्कि समाज को आत्मबोध कराने का माध्यम है। ‘सोनभद्र का इतिहास’ लिखने का उद्देश्य इस भूभाग की प्राचीनता, संघर्ष, सांस्कृतिक चेतना और योगदान को प्रमाणों के साथ राष्ट्रीय विमर्श में स्थापित करना है। मैंने इसे राग-द्वेष से मुक्त होकर, तथ्य और प्रमाण के आधार पर लिखने का प्रयास किया है।”

उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ सोनभद्र को केवल खनिज या औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सभ्यता की जन्मस्थली के रूप में प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रीय संदर्भ में महत्वपूर्ण कृति

मुख्य अतिथि अरुणकुमार उपाध्याय ने ग्रंथ को केवल सोनभद्र ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय इतिहास के संदर्भ में उपयोगी बताया। वहीं पूर्व डीजीपी धर्मवीर सिंह, पूर्व आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र सहित अन्य वक्ताओं ने भी इसे क्षेत्रीय इतिहास लेखन में मील का पत्थर कहा।

इतिहास, संस्कृति और शोध का संगम

सभाध्यक्ष पद्मश्री अभिराजराजेन्द्र मिश्र ने कहा कि,

“डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ ने एक निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति, बिना किसी आग्रह या दुराग्रह के सोनभद्र का इतिहास लिखा है। यह ग्रंथ आने वाले समय में इतिहास लेखन की दिशा तय करेगा।”

समारोह में विभिन्न रियासतों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और बड़ी संख्या में सुधी श्रोताओं की उपस्थिति रही। काव्यात्मक संचालन कविवर राजेन्द्र त्रिपाठी ने किया।

Leave a Comment

1347
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?