अमित मिश्रा
O- 2020 में शुरू हुआ विद्युतीकरण कार्य बीच में रुका, 200–400 घर अब भी बिजली से वंचित
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)। सोनभद्र जिले के चोपन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोटा/तेलगुड़वा में “हर घर बिजली” योजना का क्रियान्वयन गंभीर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2020 में बड़े स्तर पर शुरू किया गया विद्युतीकरण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है, जिससे गांव के सैकड़ों परिवार बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और विद्युत विभाग के अधिकारियों को भेजे गए प्रार्थना पत्रों में बताया गया है कि योजना के तहत गांव में बिजली के पोल, तार और मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ था। कुछ घरों में कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन बाद में विभागीय कर्मचारियों ने कई जगहों से मीटर हटा लिए और कार्य को बीच में ही छोड़ दिया।

सैकड़ों परिवार प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के लगभग 200 से 400 घर आज भी अंधेरे में जीवन यापन कर रहे हैं। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं घरेलू कार्यों में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन से बार-बार गुहार
गांव के लोगों ने इस समस्या को लेकर
- मुख्यमंत्री कार्यालय
- जिला प्रशासन
- अधिशासी अभियंता (विद्युत)
को कई बार लिखित शिकायतें भेजीं। एक पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि कार्य अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण पूरे गांव के विकास पर असर पड़ रहा है।
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
सरकार जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में 100% विद्युतीकरण के दावे कर रही है, वहीं सोनभद्र का यह मामला इन दावों की वास्तविकता उजागर करता है। पांच वर्षों से अधूरा पड़ा यह प्रोजेक्ट प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
क्या चाहते हैं ग्रामीण?
ग्रामीणों की मांग है कि,
- अधूरे कार्य को तत्काल पूरा किया जाए
- सभी घरों में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
सोनभद्र के इस गांव की स्थिति यह दर्शाती है कि योजनाओं की सफलता केवल घोषणा से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करता है।






