भगवान श्रीराम के वनवास का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए भक्त

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सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। सदर विकास खण्ड के ग्राम तरावा में शिव मंदिर रामस्वरूप तालाब पर चल रही यज्ञ एवं राम कथा के छठे दिन कथा वाटिका मानस माधुरी सुनीता पाण्डेय ने माता सीता की विवाह के उपरांत विदाई एवं भगवान श्री राम के वन गमन की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता सीता की मां सुनैना ने बड़े भारी एवं बोझिल मन से माता सीता एवं चारों बहनों को भगवान श्री राम तथा उनके चारों भाइयों के साथ विदा किया अभी माता सीता को अयोध्या में कुछ दिन ही बीते थे की राजा दशरथ ने दरबार में शीशे में अपना चेहरा देखा अपने कान के पास के बाल सफेद दिखाई दिए।

श्रवण समीप भये शीत केशा , मनहू जठरपन की अनवेशा।।
दशरथ ने सोचा कि अब हमें अपना राज पाट अपने उत्तराधिकारी सौंप देना चाहिए यह सोचकर उन्होंने भगवान श्री राम के राज्याभिषेक कि तैयारी शुरू कर दी उनके इस निर्णय के बाद संपूर्ण अयोध्या को सजाया जाने लगा अयोध्या की सजना की खबर जब मंथरा को लगी तब मंत्र ने अयोध्या के सजाने का कारण पता किया और माता कैकई को उकसाने लगी कि यदि राम राजा बन गए तो वह दासी के समान हो जाएगी। इस पर कैकई ने मन्थरा को फटकार लगाई क्योंकि कैकई भगवान राम के राज्याभिषेक की खबर सुनकर अति प्रसन्न थी परंतु मन्थरा द्वारा लगातार भरे जाने के उपरांत विचार करते समय माता कैकई स्वयं को निष्ठुर बना लेती है और कोप भवन में चली जाती है। जब राजा दशरथ को माता कैकई के कोप भवन में जाने के बारे में पता लगता है तो वह उनके समीप कोप भवन में जाते हैं और माता कैकई को समझाने का प्रयास करते हैं परंतु काफी प्रयास के बाद जब वह नहीं मानती है।  तब कैकई राजा दशरथ को पूर्व में दिए गए दो वरदान को याद दिलाती है और उसके बदले प्रथम वरदान के रूप में भगवान राम को 14 बरस का वनवास और दूसरे वरदान के रूप में भरत को राजगद्दी मांगती है।


इस अवसर पर अरविंद पाण्डेय, कृष्ण प्रसाद तिवारी, उमेश देव, आकाश देव,, सुभाष शर्मा, राम विश्वकर्मा, मुन्ना हरिजन, परोरा पासवान, धनी शंकर देव, धनंजय देव, हरिओम देव, उदय केसरी, पारस केसरी समेत सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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