मनरेगा से ‘वीएस-जी राम जी योजना’ ग्रामीण रोजगार,नीति का विकास

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अमित मिश्रा

O- कांग्रेस की शुरुआत और भाजपा का संशोधित मॉडल

सोनभद्र। भारत में ग्रामीण रोजगार और श्रम-कल्याण की नीति समय के साथ विकसित होती रही है। कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई मनरेगा से लेकर वर्तमान में भाजपा सरकार द्वारा लागू वीएस-जी राम जी योजना तक, सरकारों ने ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में विकास खंड राबर्ट्सगंज की ग्राम पंचायत बिठगांव में आयोजित ग्राम सभा में योजनाओं के अंतर और लाभों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कांग्रेस काल की शुरुआत: मनरेगा

ग्रामीण बेरोजगारी से निपटने के लिए वर्ष 2005 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) लागू किया।
इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन का मजदूरी-आधारित रोजगार देने की कानूनी गारंटी दी गई। इसका उद्देश्य बेरोजगारी कम करना, क्रय-शक्ति बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को न्यूनतम सुरक्षा प्रदान करना था।

भाजपा का संशोधित दृष्टिकोण: वीएस-जी राम जी योजना

वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ग्रामीण विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वीएस-जी राम जी योजना को मनरेगा के संशोधित व विस्तारित स्वरूप के रूप में आगे बढ़ाया है। इस योजना में केवल मजदूरी नहीं, बल्कि कौशल विकास, श्रमिक पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय संसाधनों के विकास को भी जोड़ा गया है।

श्रम उपायुक्त रविन्द्र वीर ने कहा

“मनरेगा ने रोजगार की आधारशिला रखी, जबकि वीएस-जी राम जी योजना उसी ढांचे को व्यापक बनाते हुए श्रमिकों को दीर्घकालीन सुरक्षा और कौशल से जोड़ती है। अब लक्ष्य सिर्फ काम देना नहीं, बल्कि टिकाऊ आजीविका तैयार करना है।”

जिलाविकास अधिकारी हेमंत सिंह ने कहा,

“वीएस-जी राम जी योजना मनरेगा की सीमाओं से आगे जाकर युवाओं और श्रमिकों को प्रशिक्षण, पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ती है। इससे गांवों में आत्मनिर्भरता और रोजगार की गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगी।”

मनरेगा और वीएस-जी राम जी योजना में मुख्य अंतर

  • मनरेगा: 100 दिन का मजदूरी-आधारित रोजगार, मुख्य फोकस अस्थायी काम
  • वीएस-जी राम जी योजना: रोजगार + कौशल विकास, श्रमिक पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा
  • मनरेगा: बेरोजगारी राहत पर केंद्रित
  • वीएस-जी राम जी योजना: आत्मनिर्भर गांव और दीर्घकालीन आजीविका पर जोर

ग्रामीणों को होने वाला लाभ

  • काम के साथ-साथ कौशल प्रशिक्षण
  • सामाजिक व श्रम सुरक्षा का विस्तार
  • गांव में ही स्थायी रोजगार के अवसर
  • पलायन में कमी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती

ग्राम सभा में ग्रामीणों ने योजनाओं के अंतर को समझते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सोनभद्र और राबर्ट्सगंज जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण विकास अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मानजनक और टिकाऊ जीवन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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