सोनभद्र। उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा वामपंथी कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत निगरानी और निजी डेटा मांगे जाने के विरोध में शनिवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (माकपा) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त वामदल के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी सोनभद्र के माध्यम से राज्यपाल को मांगपत्र भेजा।
वामदलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) द्वारा वामपंथी आंदोलन से जुड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं को धमकाकर निजी डेटा मांगा जा रहा है। थानों से फोन कर, व्हाट्सएप संदेश भेजकर और प्रोफार्मा थमाकर आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते का विवरण, फैमिली ट्री, निजी संपर्कों की सूची, चल-अचल संपत्ति, सोशल मीडिया प्रोफाइल, डिजिटल गतिविधियां और आपराधिक रिकॉर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां जुटाने का दबाव बनाया जा रहा है। डेटा न देने पर गिरफ्तारी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं।
नेताओं ने कहा कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित निजता के मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपराधी की तरह चिन्हित करना राज्य प्रायोजित तानाशाही है। उत्तर प्रदेश को सर्विलांस स्टेट में तब्दील करने की इस कोशिश की वामदलों ने कड़ी निंदा की।
ज्ञापन में वामपंथी कार्यकर्ताओं का निजी डोजियर जुटाने की अलोकतांत्रिक कार्रवाई पर रोक लगाने, धमकाना बंद करने और निजता के अधिकार की रक्षा करने की मांग की गई।
प्रदर्शन में भाकपा जिला सचिव कामरेड आर के शर्मा, माकपा जिला मंत्री कामरेड नन्द लाल आर्य, कामरेड प्रेमनाथ, पुरुषोत्तम, रामबचन, रामेश्वर विश्वकर्मा, जग नारायण, महेंद्र भारतीय, दुर्जन भारतीय, श्याम नारायण सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।






