पीएम के स्वच्छ भारत मिशन योजना पर भ्रष्टाचार की कालिख लगा रहे भ्रष्ट अधिकारी:- विनय श्रीवास्तव

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O- ग्रामीण शौचालय निर्माण घोटाले के आरोपियो को मिल रही मलाईदार ग्राम पंचायते

O – तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश को ठंडे बस्ते में डाला भ्रष्टचार से जुड़े अधिकारियों ने

सोनभद्र। देश मे स्वच्छता की अलख प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में जगायी और ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन अभियान चला कर शौचालय बनाये गए ,इस अभियान को अधिकारियों ने धन उगाही का अवसर समझ खूब लूट मचाया है। ग्रामीण शौचालय को लेकर जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें किस हद तक मजबूत हो चुकी हैं, इसका एक बड़ा प्रमाण ग्रामीण शौचालय निर्माण घोटाले और उसके बाद हुई संदिग्ध प्रशासनिक कार्रवाइयों से मिलता है। इस सम्बंध में भाजपा नगर अध्यक्ष विनय श्रीवास्तव ने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा 06 फरवरी 2024 में हुई जांच में ग्राम विकास अधिकारी यशवंत गौतम के विरुद्ध करोड़ों रुपये की अनियमितताएँ, जिसमें 24,71,780 रुपये की गबन की धनराशि, कागजी शौचालय निर्माण और ग्राम निधि के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए थे। जिलाधिकारी के आदेश में साफ निलंबन, वसूली, और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति लेकिन हुआ क्या? जिन्हें दंड मिलना चाहिए था, उन्हें दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरण देकर जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत में नियुक्ति दे दी गई।जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देते हुए बीजेपी नगर अध्यक्ष ने कहा कि
यह निर्णय पूरे जिले में हलचल मचा रहा है। जनपद में लोग कह रहे हैं क्या भ्रष्टाचार का इनाम तैनाती है? क्या जिलाधिकारी के आदेशों की अनदेखी करने का अधिकार किसी को है?”इसी मुद्दे को लेकर जिलाधिकारी के नाम एक विस्तृत शिकायत पत्र भी दिया गया है, जिसमें गंभीर आरोप हैं कि तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेशों का अनुपालन नही हुआ, निलंबन और वसूली की कार्रवाई बीच में ही रोक दी गई, संदिग्ध स्थानांतरण किया गया, गबन के आरोपी ग्राम विकास अधिकारी को नई जगह पोस्ट कर दिया गया और नई पोस्टिंग पर पहुँचते ही करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि यह पूरा मामला पारदर्शिता के विरुद्ध है और विभागीय मिली-भगत का बड़ा संकेत देता है। यदि जिलाधिकारी के आदेश ही दरकिनार किए जा रहे हैं तो नीचे के स्तर पर भ्रष्टाचार का संरक्षण स्पष्ट रूप से झलकता है।
जिले के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, जागरूक नागरिकों तथा ग्रामीणों का कहना है कि जनपद की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण जैसे कार्यों में भारी अनियमितताएँ बरती गई है।एक उदहारण :- विकास खण्ड दुद्धी के ग्राम पंचायत डुमरा में जांच के दौरान 139 शौचालयों के दावे में केवल 35 शौचालय बने मिले थे बाकी 104 शौचालय कागजो में ही निर्माण दिखा रिपोर्टें तैयार, भुगतान भी करा लिया गया है।अब सवाल उठ रहा है— क्या सोनभद्र में भ्रष्टाचार इतना शक्तिशाली हो चुका है कि जिलाधिकारी के आदेश भी ठंडे बस्ते में डाल दिये जा रहे हैं? क्या गबन के आरोपी अधिकारी को संरक्षण मिल रहा है? और क्या करोड़ों की धनराशि का तेजी से निस्तारण किसी बड़े खेल की तरफ इशारा कर रहा है?शिकायत में मांगा गया है कि जिलाधिकारी के आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट तैयार की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय जांच हो, नई तैनाती और आर्थिक लेनदेन की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें उखाड़ी जाएं।जनपद में शौचालय की स्थित पर ग्रामीण कहते है कि साफ-सफाई के लिए गांवो में बने शौचालय भ्रष्टाचार की गंदगी से भरा हुआ है तमाम शिकायतो के बावजूद भी कार्रवाई नही हुई ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा सिस्टम ही सड़ा हुआ है जिससे भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है।

वही इस मामले में जिला विकास अधिकारी हेमन्त सिंह ने बताया कि इस तरह की किसी शिकायत का पत्र अभी हमारे संज्ञान में नहीं आया है अगर आता है तो समुचित कार्रवाई की जाएगी।

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