27 लाख रुपये की पुलिया का निर्माण अधूरा,बास-बल्ली के सहारे चल रहे ग्रामीण

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सीएस पाण्डेय

दस माह बाद भी नही हो पाई पुलिया की ढलाई

ग्रामीण अभियत्रण विभाग द्वारा बनायी जा रही थी पुलिया

बभनी(सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। सूबे की योगी सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा देती है लेकिन आदिवासी बाहुल्य वाले विकास खण्ड बभनी में विकास की सच्चाई कुछ और ही बया करती है। बभनी विकास खण्ड के चैनपुर पुरानडीह पर पुलिया दस माह बाद भी ढलाई नही हो पाया जिस कारण ग्रामीणों को बास बल्ली के सहारे काम चला रहे है। जिसको लेकर ग्रामीणों मे नाराजगी है।

लाखों खर्च, सुविधा शून्य

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास खण्ड बभनी के चैनपुर पुरान डीह मे ग्रामीण अभियत्रण सेवा विभाग द्वारा बनाये जा रहे पुलिया निर्माण को दस महीने बीत चुके हैं, बावजूद इसके न तो पुलिया तैयार हुई और न ही काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी का भुगतान किया गया। विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी ने विकास को ठप कर दिया है।

हर दिन हादसे का खतरा

पुलिया अधूरी होने के कारण ग्रामीणों ने खुद ही बांस और बल्लियों का अस्थायी रास्ता बना लिया है। बारिश के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं हर दिन जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरते हैं।

इस 27 लाख रुपये के लागत की पुलिया निर्माण के बावजूद ग्रामीणों को सुविधा नही मिल पा रहा है। ग्रामीण बास बल्ली बिछाकर आवागमन करने को विवश है।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

ग्रामीणों ने पुलिया निर्माण मे विभागीय लापरवाही का आरोप लगाया है। विभाग और ठेकेदार की लापरवाही के कारण लोग आज भी परेशान है।

ग्रामीण संतोष दुबे, अशोक, संजय, पार्वती और महेश सहित कई लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

इस अधूरे का कार्य का विरोध करने वाले ग्रामीणों में सन्तोष दुबे, अशोक, संजय, पार्वती, महेश ने आन्दोलन की चेतावनी दी है।

सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं:

  • 27 लाख रुपये गए कहां?
  • 10 महीने में ढलाई तक क्यों नहीं हो सकी?
  • मजदूरों की मजदूरी क्यों बकाया है?
  • क्या विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन की बंदरबांट हुई?
  • ग्रामीणों जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट राते हुए कार्यवाही की मांग किया है।

यह सिर्फ एक पुलिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आएगा।

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