वन विभाग की मिलीभगत से ‘हरित हत्या’! सैकड़ो पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर बड़ा संकट

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अमित मिश्रा

O- पर्यावरण को झकझोर देने वाली रिपोर्ट। “हरित हत्या” का खुलासा

दुद्धी (सोनभद्र)। देश जब एक ओर पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। म्योरपुर वन क्षेत्र के कटौन्धी गांव के जंगलों में खुलेआम हजारों हरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है, और आरोप सीधे वन विभाग की मिलीभगत पर लग रहे हैं।

“हरित नरसंहार” का ग्राउंड जीरो

रेलवे ट्रैक से कुछ ही दूरी पर लगभग पांच बीघा वन भूमि पर सागवान, खैर (कत्था) और सिद्धा जैसे बहुमूल्य पेड़ों को मोटर और इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से बेरहमी से काटा जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पूरे इलाके में पेड़ों के ठूंठ ही ठूंठ नजर आ रहे हैं।

कटे हुए पेड़ों को मौके पर ही सिल्ली (लकड़ी के टुकड़ों) में बदला जा रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन लकड़ियों पर कोई सरकारी छपान (मार्किंग) तक नहीं है, जो पूरी प्रक्रिया को अवैध साबित करता है।

मिलीभगत के आरोप, रिश्वत का खेल?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह जमीन कथित रूप से झारखंड के पलामू निवासी बैजनाथ (जो खुद को सेना का जवान बताया जा रहा है) या उसके करीबी के नाम पर खरीदी गई है।

सबसे बड़ा आरोप यह है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को करीब ₹2.5 लाख की अग्रिम राशि देकर इस “हरे कत्लेआम” को अंजाम दिया गया।

नियमों की खुलेआम धज्जियां

वन विभाग के नियमों के अनुसार:

  • 17 से अधिक हरे पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं दी जाती
  • हर कटे पेड़ पर सरकारी छपान अनिवार्य होता है
  • परिवहन की अनुमति के बिना लकड़ी नहीं हटाई जा सकती

लेकिन यहां:

  • हजारों पेड़ काट दिए गए
  • कोई छपान नहीं
  • लकड़ी मौके पर जमा
  • और विभाग मौन!

अधिकारी क्या कहते हैं?

वन प्रभाग रेनुकूट के प्रभागीय वनाधिकारी कमल कुमार का कहना है-

“17 पेड़ों से अधिक की अनुमति कहीं नहीं दी गई है। यदि इससे ज्यादा कटान हुआ है तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। जांच के आदेश दे दिए गए हैं और लकड़ी जब्त की जाएगी।”

बड़ा सवाल: क्या जांच ही अंतिम कार्रवाई होगी?

जब देश में हर साल करोड़ों रुपये पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाने पर खर्च हो रहे हैं, तब इस तरह का “हरा नरसंहार” कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • क्या वन विभाग खुद इस खेल में शामिल है?
  • क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
  • क्या पर्यावरण की कीमत पर भ्रष्टाचार का खेल जारी रहेगा?

जनता की मांग

अब स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की एक ही मांग है:
– इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो
– दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो
– अवैध कटाई में शामिल लोगों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी हो

अगर समय रहते इस “हरित अपराध” पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ सोनभद्र का नहीं बल्कि पूरे देश के पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी साबित होगा।

अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या जंगल यूं ही उजड़ते रहेंगे…

Leave a Comment

1423
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?