मंथरा-कैकेयी संवाद ने किया मंत्रमुग्ध, दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार ने की आरती, बोले- आदिवासी समाज आज भी जीवित रखे है राम की परंपरा
म्योरपुर / सोनभद्र। म्योरपुर में चल रही श्रीराम लीला के सातवें दिन राम वनवास प्रसंग का मंचन किया गया। मंचन के दौरान एससी/एसटी आयोग के उपाध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार ने श्रीराम की आरती कर कहा कि श्रीराम वन गए, सब कुछ छोड़ा लेकिन धनुष-बाण नहीं छोड़ा। श्रीराम की इस परंपरा को आदिवासी समाज आज भी जीवित रखे हुए है। बसपा के दुद्धी विधानसभा प्रभारी संजय गोंड धुर्वे ने भी आरती कर कहा कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने की जरूरत है।
लीला का मंचन दशरथ दरबार से शुरू हुआ। दशरथ मंत्रियों से कहते हैं कि चौथा पन आ रहा है, क्यों न अयोध्या का राज्य राम को सौंप दिया जाए। मंत्रियों ने सहमति दी। उधर देवता चिंतित होकर ब्रह्मा जी के पास जाते हैं कि राम राजपाठ में व्यस्त हो जाएंगे तो राक्षसों का संहार कैसे होगा। तब ब्रह्मा जी मां सरस्वती का आह्वान कर मंथरा की जिह्वा पर बैठने को कहते हैं।
मंथरा कैकेयी के पास जाकर कान भरती है कि राम राजा बन गए तो तेरा बेटा नौकर रहेगा। पहले तो कैकेयी क्रोधित होकर मंथरा को धक्का देती है, लेकिन बाद में बात उसके मन में घर कर जाती है और वह कोप भवन में चली जाती है। दशरथ मनाने जाते हैं तो कैकेयी दो वर मांगती है- भरत का राज्याभिषेक और राम को 14 वर्ष का वनवास। यह सुन दशरथ मूर्छित हो जाते हैं। पिता की आज्ञा मान राम, लक्ष्मण और सीता वन को प्रस्थान करते हैं और अयोध्या सूनी हो जाती है। अयोध्यावासियों का रो-रो कर बुरा हाल हो जाता है।
इस मौके पर महाप्रबंधक सुनील कुमार सिंह, अध्यक्ष मोनू जायसवाल, मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी, अजय कुमार, पंकज सिंह, व्यास आशीष अग्रहरी बिट्टू, अजय अग्रहरी सोनू सहित कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।









