सोनभद्र के देवहार में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत, कांग्रेस

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परिजनों ने पुलिस और एनजीओ पर लगाया हत्या का आरोप

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज सदर विधानसभा 401 के ब्लॉक नगवा अंतर्गत ग्राम देवहार में 23 सितंबर को आदिवासी युवक लक्ष्मी खरवार का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिजनों ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या कर लटकाने का मामला बताया है और पुलिस व एक प्राइवेट एनजीओ पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मृतक के भाई लक्ष्मण खरवार ने बताया कि 23 सितंबर को हंस फाउंडेशन नामक प्राइवेट एनजीओ की एम्बुलेंस गांव में निःशुल्क दवा बांटने आई थी। उनका भाई लक्ष्मी खरवार भी दवा लेने गया, लेकिन एनजीओ कर्मियों ने दवा देने से मना कर दिया, जिस पर विवाद हो गया। आरोप है कि कुछ देर बाद मांची थाने की पुलिस घर पर पहुंची, लक्ष्मी के साथ मारपीट की और धमकी दी कि “तुमको देवहार गांव में नहीं रहने देंगे।” डर के कारण लक्ष्मी रात में दूसरे घर में सोने चला गया और रात में ही उसकी हत्या कर शव को फंदे पर लटका दिया गया, ताकि आत्महत्या प्रतीत हो।
मामले की जानकारी मिलने पर बुधवार को जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष रामराज सिंह गोंड के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा और पीड़ित परिजनों से मिलकर पूरी घटना की जानकारी ली।
जिलाध्यक्ष रामराज सिंह गोंड ने कहा कि यह भाजपा सरकार के जंगलराज का जीता-जागता सबूत है। सिर्फ दवा मांगने पर एक गरीब आदिवासी युवक को पुलिस द्वारा पीटना, गांव से निकालने की धमकी देना और फिर उसकी हत्या हो जाना पुलिस और एनजीओ की मिलीभगत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रदेश सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, शहर अध्यक्ष फरीद अहमद, प्रदेश पब्लिक सिटी मीडिया प्रवक्ता संगीता श्रीवास्तव, ब्लॉक अध्यक्ष उदय लड्डू पांडे और वरिष्ठ कांग्रेसी व पूर्व जिला प्रवक्ता गोपाल पाठक मौजूद रहे। गांव में विजेंदर खरवार, लक्ष्मण खरवार, रामचंद्र खरवार, अशोक, रामशिला, सुदर्शन, राजवंश, रामविलास, राजकुमार, बुद्धू, नारायण सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें – पूरे मामले की CBI या उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।, दोषी मांची थाने के पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए।, हंस फाउंडेशन एनजीओ की भूमिका की जांच कर उसकी मान्यता रद्द की जाए।, पीड़ित परिवार को एक करोड़ की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

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