–हिंदी माह के समापन पर गीत कस्तूरी साहित्यिक संस्थान की ओर से आयोजित हुआ काव्य समारोह
सोनभद्र -। गीत कस्तूरी साहित्यिक संस्थान की ओर से बुधवार को हिंदी पखवारे एवं हिंदी माह के समापन पर रॉबर्ट्सगंज स्थित तेज नगर में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। अध्यक्षता साहित्यकार पारसनाथ मिश्र ने की। कवियों ने हिंदी के सम्मान और महत्व के साथ विभिन्न विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर काव्य संध्या को यादगार बना दिया।
मुख्य अतिथि गीतकार जगदीश पंथी ने कहा कि मुर्दा है देश जिसकी कोई भाषा नहीं है, अभिव्यक्ति की बिंदी को लगाना है दोस्तों। राकेश शरण मिश्र ने सुनाया कि “हिंदी केवल शब्द नहीं है, भारत की पहचान है, हिंदी में ही गूंज रहा, अपना हिंदुस्तान है।मेघ विजयगढ़ी ने देशप्रेम से ओतप्रोत पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा—भारत के बाल की गुलाल मेरी हिंदी है।
राजेश द्विवेदी ‘राज’ ने कहा— भांति-भांति की भाषा जग में, पर हिंदी सबसे न्यारी है।” अध्यक्षता कर रहे पारसनाथ मिश्र ने कहा— “जीवन मूल्यों का विरोध है, जीवन दर्शन का विरोध है, हिंदी का विरोध, सदाचरण का विरोध है।
अल्का केसरी ने समय और सत्य पर आधारित पंक्तियां सुनाईं— “वक्त की अदालत में कोई झूठ चलता नहीं, लाख कर लें कोशिश पर फैसला बदलता नहीं। अनुपमा वाणी ने कहा— “शब्द कम पड़ गए, मौन संवाद था, अगहनी धूप सा आपका साथ था।” विवेक चतुर्वेदी ने अपनी रचना में कहा— कहानी हो नहीं पाती मुकम्मल, कोई किरदार मर जाता है मुझमें।
गीत कस्तूरी साहित्यिक संस्थान की अध्यक्ष डॉ. रचना तिवारी ने सभी अतिथियों का सम्मान किया और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा— “हिंदी है अस्तित्व है हमारा, हम हैं हिंदी भाषी, रानी तीनों लोकों की, हर भाषा इसकी दासी।
काव्य गोष्ठी का संचालन सोन साहित्य संगम के राकेश शरण मिश्र ने किया। कार्यक्रम में आलोक चतुर्वेदी, दिनेश तिवारी, अमरनाथ सिंह, दिलीप शुक्ला, प्रिंस पाठक, रानी, रूपा, प्रतिमा और विनोद शर्मा सहित अन्य श्रोता उपस्थित रहे।








