राजस्व विभाग के खिलाफ अधिवक्ताओं का हल्लाबोल, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

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नवीन कुमार

राजस्व कर्मियों पर मनमानी और आदेशों की अवहेलना का आरोप

कोन(सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)। सम्पूर्ण समाधान दिवस में ओबरा तहसील के अधिवक्ताओं ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं हो रहा जिससे  सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विस्तृत प्रार्थना पत्र तहसील दिवस अधिकारी को सौंपा। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील में विभिन्न राजस्व मामलों में शासनादेशों तथा न्यायालयों के आदेशों का सही ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और प्रदेश सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।


अधिवक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्री व खारिज-दाखिल की प्रक्रिया में न्यायालयों द्वारा दिए गए आदेशों का पालन केवल मालिकाना हक तक ही सीमित कर दिया जाता है, जबकि आदेशों में दिए गए अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया जाता है। इससे न्यायालय से प्राप्त राहत और अधिकार प्रभावी नहीं हो पाते तथा न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर हो रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि असंक्रमणीय भूमि को पांच वर्ष बाद स्वतः संक्रमणीय घोषित किए जाने संबंधी शासनादेश का तहसील स्तर पर सही अनुपालन नहीं हो रहा है। रिपोर्ट लगाने से लेकर भूमि को संक्रमणीय घोषित करने तक की प्रक्रिया में अत्यधिक विलंब और लापरवाही बरती जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे शासन की मंशा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।


अधिवक्ताओं ने वरासत संबंधी मामलों को भी उठाया। उनका कहना था कि ऑनलाइन वरासत आवेदन सफल होने का संदेश तो प्राप्त हो जाता है, लेकिन कई महीनों बाद भी खतौनी में नाम दर्ज नहीं हो पाता। इससे आवेदकों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ज्ञापन में अंश निर्धारण के मामलों का भी उल्लेख किया गया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद राजस्व कर्मचारी अंश निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करने के बजाय आवेदकों को टालते रहते हैं। इससे खतेदारों को अपने हिस्से का अधिकार प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
इसके अलावा धारा 116 के तहत राजस्व न्यायालय द्वारा खाता एवं फाट अलग करने के आदेशों के अनुपालन में भी अनावश्यक देरी का आरोप लगाया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि आदेश पारित होने के बाद भी खतौनी में आवश्यक संशोधन नहीं किए जा रहे हैं, जिससे सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का मजाक बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता में यह धारणा बन रही है कि शासन की नीतियों का प्रभाव तहसील स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है।


अधिवक्ताओं ने तहसील दिवस अधिकारी से मांग की कि सभी लंबित एवं विवादित राजस्व कार्यों के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अधिवक्ता आगे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


वही ज्ञापन देने वालो में तहसील क्षेत्र के एडवोकेट प्रभास पांडे, विनय कंनौजिया,सम्पूर्णना नंद,विनोद कुमार, रवि शंकर,अजित कुमार आदि कई अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर मौजूद रहे।

वही अधिकारियों ने प्रकरणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन मिला

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