अमित मिश्रा
पीड़ित राधेशयम सोनी ने आयुक्त चकबंदी से उप सहायक चकबंदी की शिकायत, जांच मिली डीडीसी को , अब देखना होगा कितनी निष्पक्ष जांच होती है
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। वही कातिल , वही मुद्दई और वही मुंसिफ वाली कहावत इन दिनों जनपद के चकबंदी विभाग में चल रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चकबन्दी प्रक्रिया ने तेजी लाने के लिए भले ही कड़े निर्देश जारी किए लेकिन जनपद में पिछले 12 महीने से धरना पर बैठे हुए है तो वही एक व्यक्ति चकबंदी आयुक्त से शिकायत किया है कि विपक्षियों के प्रभाव में आकर उप संचालक चकवन्दी गलत आदेश जारी कर रहे है। जिस पर आयुक्त ने डीडीसी को निर्देश दिया है कि निष्पक्ष जांच कर आख्या प्रस्तुत करें।
पीड़ित राधेश्याम सोनी ने चकबंदी आयुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा आरडी 2009 पेज 625 व उच्च न्यायालय द्वारा आरडी 2006 पेज 214 द्वारा प्रतिपादित आदेश / नजीर को न मानकर तथा 1359 फसली मालिक पुत्र जगमोहन के इन्द्राज को न स्वीकार कर उप संचालक चकबन्दी द्वारा साक्ष्यों के विपरीत भू माफिया व विपक्षीगण के दबाव व प्रभाव में फर्जी इन्द्राज को यथावत रखकर न्याय से वंचित कर दिये।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आरडी 2009 पेज 625, पैरा-10, 11 व उच्च न्यायालय 2006 आरडी पेज 2014 द्वारा प्रतिपादित आदेश को नजीर व तथा 1359 फसली मालिक पुत्र जगमोहन के इन्द्राज को न मानकर उप संचालक चकबन्दी द्वारा साक्ष्यों के विपरीत भू माफिया व विपक्षीगण के दबाव व प्रभाव में फर्जी इन्द्राज को यथावत रखकर न्याय से वंचित कर दिये। उप संचालक चकबन्दी अधिकरी द्वारा अपने पेशकार विष्णु कुमार के माध्यम से धरमचन्द व करमचन्द पुत्रगण हाकिमचन्द के पक्ष में मोटी रकम लेकर निर्णय पारित कर दिये।
उक्त के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर सन्दर्भ सं०-15200250226616 09 नवम्बर 2025 को प्रार्थना पत्र दर्ज किया था जिसमें 1359 फसली का जिक्र भी प्रार्थी ने किया है।

उप संचालक चकबन्दी द्वारा उस तथ्य को निर्णय में न मानकर विधि विरूद्ध आदेश पारित कर व अपने पद का दुरूपयोग कर निर्णित किये। उक्त पत्रावली की जांच स्वयं अथवा कमेटी गठिक कर कराया जाना न्यायसंगत है।
राधेश्याम ने बताया कि वह भू माफिया से लड़ते-लड़ते थक हार गया है एवं विपक्षीगण और पेशकार विष्णु कुमार द्वारा धमकी दी जा रही है कि तुमको भी जान से मरवा देंगे और तुम लड़ने लायक नहीं रह जाओगे।
वही राधेश्याम ने बताया कि उसके आराजी सं० 183/2 फसली 1346 नवीन परती / जमींदार के खाते के बाद मालिक पुत्र जगमोहन का नाम रहा। सन् 1347 के खाता सं0-31 पर लाल इन्द्राज मे दर्ज है तथा फसली 1359 के खसरा, 1360 की खतौनी, 1363-65 की खतोनी व 1366 से 1368 की खतौनी खाता सं0 77 पर उत्तर प्रदेश भूगि अधिकार अधिनियम की धारा-134 से 137 के तहत भूमि राजस्व का 20 गुना मालगुजारी जमा किया था तथा जमा करने के बाद बतौर लाल स्याही से भूमिधर अंकित है। सर्वे के बाद की खतौनी फसली सन् 1375-1377 में खाता सं0-54 फर्जी अमलदरामद की गई इसी खतौनी से मुख्य विवाद की उत्पत्ति होती है।
वही चकबन्दी आयुक्त के निर्देश पर मन्नीलाल यादव तत्कालीन उप संचालक चकबन्दी के पत्रांक सं0-41/रीडर-शि०जाँच/2015 13 फरवरी 2015 के निर्देश पर बन्दोबस्त अधिकारी चकबन्दी द्वारा है कि श्री सोनी के प्रार्थना पत्र में अंकित तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में जाँच कर कार्यवाही करें तथा विषयांकित प्रकरण में तहसीलदार, राबर्ट्सगंज द्वारा पूर्व मे 27 नवम्बर 2014 व 08 दिसम्बर 2014 को उपलब्ध करायी गयी आख्या के आधार पर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाते हुए अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, जिससे आख्या चकबंदी आयुक्त को प्रेषित की जा सके।
पीड़ित ने बताया कि सन् 1333 फ० खसरे में आ०न०-183/2 क्षेत्रफल 01 बीघा 14 विश्वा खाता संख्या 9 पर सिकन्दर खां बदस्तूर अंकित है, जिसमें पड़ताल में धान कुल क्षेत्रफल 01 बीधा 14 विस्वा दर्ज है व अभियुक्ति में बकबूजा खेमई लिखा है, जो खसरे की लिखावट से थोड़ा मोटा है। सन् 1334 १० खसरे में आराजी नं0-183/2 क्षेत्रफल 01 बीधा 14 विस्या खाता संख्या-13 दूसरे पेन व स्याही से अंकित है व खसरे को लिखे जाने में प्रयुक्त स्याही से सिकन्दर खां बदस्तूर लिखा है जो काटा गया है एवं दूसरे पेन व स्याही से खाता संख्या-13 अंकित है. उसी स्याही से खेमई आहीर बद० नम्बर 180 मु०नं०-01 सा० लिखा गया है, जिसके कॉलम 07 में बटाई 1/3 लिखा है व पडताल में क्षेत्रफल 01 बीधा 14 विस्वा दर्ज है। इस प्रकार अभिलेखों में हेरा-फेरी कर, कूट रचित ढंग से खेमई अहीर का नाम अंकित कराते हुए पुनः बुद्धिराम पुत्र मुन्नी निवासी ग्राम उरमौरा, परगना बड़हर, तहसील राबर्ट्सगंज का नाम दर्ज कराकर श्रीमती प्रभावती पत्नी हाकिम चन्द्र जायसवाल निवासी कस्बा राबर्ट्सगंज, पिपरी-रोड द्वारा बैनामा लिया गया है।
इस तरह से उप संचालक चलबन्दी के कार्यालय में पेशकार और लिपिकों की मिलीभगत से विपक्षियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।







