ग्रामीणों का आरोप- लेखपाल तीन साल से लगा रहे भ्रामक रिपोर्ट, 1997 में पट्टा हुआ ही नहीं

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

प्रभारी मंत्री के निर्देश के बाद भी कार्रवाई शून्य,मनरेगा सड़क निर्माण भी अधूरा,

पाइप न लगाने और मिट्टी कार्य अधूरा छोड़ने पर ग्राम पंचायत सचिव पर मिलीभगत का आरोप

सोनभद्र। पेटराही गांव में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विवादित भूमि प्रकरण में लेखपाल की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से संबंधित लेखपाल द्वारा लगातार गलत, भ्रामक और तथ्यविहीन रिपोर्ट लगाकर अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है, जिससे गांव में तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि को लेखपाल द्वारा “49च” बताकर पट्टा भूमि दर्शाया जा रहा है, उसका तहसील अभिलेखों में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। तहसील स्तर से स्पष्ट रिपोर्ट जारी होने के बाद भी लेखपाल लगातार अपनी मनमानी रिपोर्ट लगाकर मामले को उलझाते रहे। आरोप है कि लेखपाल की गलत रिपोर्टिंग के कारण शिकायतकर्ता पक्ष का मनोबल बढ़ा और गांव में अवैध कब्जे की स्थिति पैदा हो गई। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1997 में संबंधित भूमि का कोई पट्टा हुआ ही नहीं था, फिर भी लेखपाल द्वारा उसे पट्टा भूमि बताकर प्रशासनिक अधिकारियों को भ्रमित किया जा रहा है। गांव के लोगों का आरोप है कि लेखपाल जानबूझकर तथ्यों को दबा रहे हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे कभी भी बड़ा विवाद या अप्रिय घटना हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने जिले में आए प्रभारी मंत्री को भी शिकायती पत्र सौंपा था। प्रभारी मंत्री द्वारा जिलाधिकारी को निष्पक्ष निस्तारण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसके बावजूद राजस्व विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में आ गई है। इसी गांव में मनरेगा योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में संतोष पाण्डेय के घर से देवेन्द्र नाथ के घर तक सड़क निर्माण स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत पेटराही द्वारा सड़क निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। प्राक्कलन में आठ ह्यूम पाइप स्वीकृत थे, लेकिन तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी प्रवीण कुमार द्वारा न तो पाइप लगाए गए और न ही मिट्टी का कार्य पूरा कराया गया।ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पंकज मौर्य ने भी आपसी मिलीभगत कर कई बार गलत और भ्रामक रिपोर्ट लगाई, जिससे कार्य जानबूझकर लंबित रखा गया। बरसात में सड़क पर जलभराव हो जाता है, सड़क कट रही है और किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो गांव में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1545
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?