खनन हादसा:खनन में सफेदपोशो पर पीएमएलए एक्ट 2002 के तहत हो कार्यवाही: ऋतिशा गोंड़

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अमित मिश्रा

खनन हादसे में मजदूरों की मौत के लिए जिलाधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार: विकास शाक्य

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद में बिरासा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातिक गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति से महज चंद दूरी पर पत्थर खदान धसने से मजदूरो की मौत हो गई। इसी खदान सहित अन्य क खिलाफ एनजीटी में दाखिल याचिका पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर बताया है कि पत्थर खदान का संचालन मानक के अनुरूप है। मजदूरों के मौत के लिए जिलाधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं इनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए उक्त बातें याचिका कर्ता के अधिवक्ता अभिषेक चौबे एवं विकास शाक्य ने कही।


अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने कहा कि मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स की खदान 500 फीट से अधिक गहरी और खतरनाक तरीके से खड़ी है हाइट बेंच नहीं है फेरेटिक जोन के नीचे पानी निकाल कर खनन किया जा रहा है जो ई.सी. शर्तों के खिलाफ है इन्हीं विषयों पर ऋतिशा गोंड की ओर से 268 पेज की याचिका मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स के अलावा राधे-राधे इंटरप्राइजेज मे० साई बाबा स्टोन मे० कामाख्या स्टोन के विरुद्ध NGT में दाखिल की गई है जिस पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर अदालत को बताया कि मैं और संयुक्त टीम द्वारा मौके की जांच करने पर मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स व अन्य खदान का संचालन मानक के अनुरूप पाया गया है। हादसे के बाद या पहले जिसने भी मौका देखा होगा बिल्कुल स्पष्ट है कि जिलाधिकारी ने सफेद झूठा शपथ पत्र दिया है जिसके परिणाम स्वरूप 6 मजदूरों की मौत हो गई जिलाधिकारी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाने की मांग किया है।


पर्यावरण पर काम करने वाले विकास शाक्य एडवोकेट ने कहा कि मे० कृष्णा माईनिंग वर्ष के संचालक मधुसूदन सिंह का बहुत नजदीकी संबंध सफेदपोश लोगों से है जिसे बाहुबली और रसुक के रूप में जनता देखती है उनका सोनभद्र और मिर्जापुर दोनों जिला पंचायत पर अदृश्य कब्जा है खनन के क्षेत्र में बाहुबलियों की पहली एंट्री बालू की लीज में हुआ इसके बाद पत्थर खदान में भी पैठ बना लिए उनके अलावा अन्य कई सफेद पोस भी इसमें शामिल हो चुके हैं। सोनभद्र का खनन अब खून से सना हो गया है आए दिन नियमों को ताख पर रखकर खनन हो रहा है पर्यावरण को नुकसान पहुंचा या जा रहा है। जिलाधिकारी ने झूठा शपथ पत्र अदालत में इसलिए भी दिया की सारे गठजोड़ एक विशेष वर्ग का है जिसमें बर्दहस्त मुख्यमंत्री का भी प्राप्त है।

श्री शाक्य ने कहा कि सफेदपोश लिखावटी कागजों मे साझेदार नहीं होते इसलिए यह मामला पीएमएलए एक्ट 2002 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर इस गठजोड़ की जांच कराई जाने की मांग किया है।

खनन मामले की याचिका कर्ता ऋतिशा गोंड ने बताया कि 12 जुलाई 2024 को सारे साक्ष्य के साथ याचिका एनजीटी मे दाखिल की गई थी और खदान को संचालन योग्य नहीं होना बताया गया था इसके संबंध में 4 नवंबर 2024 को सभी पक्षकारों को अदालत से नोटिस भी जारी किया था परंतु जिला अधिकारी ने जनता और अदालत दोनों को गुमराह किया और सच्चाई को छुपाया है, परिणाम स्वरूप मजदूरों की मौत हो गई। इस लड़ाई में जनता नही जागी तो खदान के बाहर भी पर्यावरण के संतुलन बिगड़ने से और भी बड़े तादाद में मौतें होंगे खनन हादसे में मृतक के परिजनों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की है।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1544
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?