पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत

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अमित मिश्रा

O- तीजा पर्व पर उमड़ी आस्था की भीड़

सोनभद्र। जिलेभर में हरतालिका तीज का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। तीजा के नाम से प्रसिद्ध यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाएं बड़े ही विधि-विधान के साथ करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं निर्जला उपवास रखकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनके तप से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी स्वीकार किया। तभी से यह व्रत विशेष महत्व रखता है।

आचार्य पंडित सौरभ कुमार भारद्वाज ने बताया कि हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर “उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये” मंत्र के साथ संकल्प लेती हैं। यह व्रत पूरी तरह निर्जला रहता है और पारण से पूर्व एक बूंद पानी तक ग्रहण करना वर्जित माना गया है। रातभर महिलाएं जागरण कर भजन-कीर्तन करती हैं और अगले दिन पूजा-पाठ के बाद व्रत का पारण करती हैं।

इस व्रत में केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

शिव-पार्वती को अर्पित किए गए विशेष भोग

हरतालिका तीज पर भक्तों ने शिव-गौरी को विभिन्न व्यंजन और फल अर्पित किए। इनमें केला, सेब, अंगूर, संतरा और आम जैसे फल शामिल रहे। खीर, मठरी, गुजिया, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयां विशेष रूप से बनाई गईं। शिवलिंग पर दूध अर्पित किया गया, वहीं पान, हलवा और बादाम, काजू, पिस्ता जैसे सूखे मेवे भी भोग स्वरूप अर्पित किए गए।

मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। जगह-जगह महिलाओं ने सुहाग की परंपरागत सामग्रियों से पूजा कर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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