सोनभद्र की धरती के नीचे छिपा ‘परमाणु भविष्य’? 1100 फीट गहराई में यूरेनियम की खोज, चितपहरी बना वैज्ञानिकों का केंद्र

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अमित मिश्रा

O- जंगल के भीतर ऊर्जा की खोज, सोनभद्र में परमाणु टीम सक्रिय

O- सोनभद्र के चितपहरी जंगल में यूरेनियम की खोज शुरू, परमाणु ऊर्जा विभाग की टीम ने 1100 फीट गहराई तक की खुदाई

सोनभद्र । देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में यूरेनियम खनिज की खोज शुरू कर दी है। म्योरपुर ब्लॉक के पूर्वी देव हार इलाके के घने चितपहरी जंगल में विभाग की एक टीम द्वारा गुपचुप तरीके से 1100 फीट गहरी खुदाई की जा रही है।

पूर्वी देव हार के जंगल में वैज्ञानिकों की हलचल, ग्रामीणों में कौतूहल

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस खुदाई का उद्देश्य क्षेत्र में यूरेनियम की उपलब्धता की जांच करना है। भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) की वैज्ञानिक टीम काफी समय से सोनभद्र के इस क्षेत्र में भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही थी। भू-गर्भीय संकेतों और रॉक सैंपल के परीक्षण में संभावनाएं मिलने के बाद यहां खुदाई का कार्य शुरू किया गया है।

खुदाई के केंद्र सोनभद्र के म्योरपुर ब्लाक के चितपहरी का जंगल बनाया गया है

चितपहरी गांव के जंगलों में की जा रही यह खुदाई पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है। टीम के पास अत्याधुनिक ड्रिलिंग मशीनें और सेंसर लगे यंत्र हैं, जिनकी सहायता से गहराई में मौजूद खनिज तत्वों की पहचान की जा रही है। खुदाई के शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिकों को कुछ रेडियोधर्मी तत्वों के संकेत मिले हैं, लेकिन फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि वह शुद्ध यूरेनियम है या उससे जुड़ा कोई अन्य खनिज।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग सतर्क

इस पूरे अभियान को लेकर स्थानीय प्रशासन और वन विभाग पूरी तरह सतर्क हैं। चूंकि खुदाई वन क्षेत्र के अंदर हो रही है, इसलिए वन्यजीवों और पर्यावरण पर असर को लेकर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। खुदाई स्थल के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है, और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

ग्रामीणों में कौतूहल का विषय

चितपहरी और आसपास के गांवों में इस खोज को लेकर काफी उत्सुकता है। ग्रामीणों को पहली बार इतने बड़े स्तर पर वैज्ञानिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन टीम के आने-जाने और भारी मशीनरी की आवाजाही ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।

बताते चले कि क्या है यूरेनियम और इसका महत्व?

यूरेनियम एक अत्यधिक महत्वपूर्ण रेडियोधर्मी खनिज है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से परमाणु ऊर्जा उत्पादन और सैन्य हथियारों में किया जाता है। भारत में यूरेनियम के सीमित भंडार हैं और इसकी खोज की प्रक्रिया लगातार जारी है। अगर सोनभद्र में इसकी पुष्टि होती है, तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

सोनभद्र में खनिज संसाधनों का भंडार

सोनभद्र जिला पहले से ही अपनी खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है। यहां बॉक्साइट, मैग्नीज़, आयरन, सिलिका आदि जैसे खनिज पहले से खनन किए जा रहे हैं। अगर यूरेनियम की पुष्टि होती है तो यह इस जिले के खनन मानचित्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान दिला सकता है।

बाहरहाल चितपहरी जंगल में खुदाई और परीक्षण कार्य जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां यूरेनियम की पुष्टि होती है, तो यह भारत के परमाणु कार्यक्रम को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए द्वार भी खोल सकता है।

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