काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

अमित मिश्रा

मीरा मोहन सी प्रीत लिख देना,,सब के अधरों पे गीत लिख देना

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी के तत्वावधान में सोनभद्र बार एसोसिएशन के सभागार में काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार कविराज रमाशंकर पाण्डेय विकल और मुख्य अतिथि साहित्यकार रामनाथ शिवेन्द्र  रहे। वही काव्य संध्या का संचालन अशोक तिवारी ने किया।

काव्य संध्या की शुरआत दिवाकर द्विवेदी मेघ ने  वाणी वंदना करके किया। प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने मीरा मोहन की प्रीत लिख देना, सबके अधरों पे गीत लिख देना, दिल में हो रुदन कहीं भी नहीं, साथ साजन हो जीत लिख देना सुनाकर वातावरण सृजित कर वाहवाही लूटी। प्रयागराज से पधारे शायर शारिक मखदूम फूलपुरी का अभिनंदन अंगवस्त्र लेखनी पुस्तक प्रशस्ति पत्र देकर किया गया
उनकी गजल, डूबा रहा गमों में किनारा नहीं मिला, मैं चाहता था जो वो सहारा नहीं मिला सुनाकर तालियां बजवाते रहे। ओज की कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने,, जयहिंद वंदेमातरम का जो करते सम्मान नहीं। वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं सुनाकर राष्ट्रीयता को मुखर स्वर दिया और लोगों में देशभक्ति की हुंकार भरी।
दयानंद दयालू , दिलीप सिंह दीपक,  सुधाकर स्वदेश प्रेम ने भी काव्य पाठ किया। वीर रस के कवि प्रभात सिंह चंदेल ने सुपूत पूत भारती के लहू से ललाट पर तिलक लगाते हैं सुनाकर शहीदों को नमन किया सराहे गये। धर्मेश चौहान ने जहाँ टीबी और बीवी शिर्षक से हास्य व्यंग्य सुनाकर तालियां बटोरीं वहीं उनकी देश भक्ति की रचना वतन पर होता जो कुरबान वहीं भगवान् मेरा है काफी सराही गई।

अशोक तिवारी ने, हाँ हमने तुझसे प्यार किया और क्या किया,,, वरिष्ठ शायर अब्दुल हई ने उधर से गुजरा तो झुक कर मिला हिमाला भी, सलीका प्यार का इसको सिखा दिया किसने सुनाकर महफ़िल लूट लिया।
दिवाकर दिवेदी मेघ ने,, बरवा कटा के कट कौवा, बीए पढ़े लागल बा बेटौवा सुनाकर खूब हंसाये।शाइर जुल्फेकार हैदर खान ने गजल सुनाकर तालियां बटोरीं।मुख्य अतिथि रामनाथ शिवेन्द्र ने कौमी एकता की रचना, हमें रोटियां ही दीजिये बहुत भूख लगी है ।दे रहे हैं गीता कुरान किसलिए सुनाकर समरसता की बात किया। नरेन्द्र कुमार पाठक ने वक्तव्य देकर देश की दिशा दशा पर चिंतन दिया। अंत में अध्यक्षता करते हुये सोनांचल साहित्यकार परिषद् प्रमुख कविराज रमाशंकर पांडेय विकल ने लोकभाषा व हिंदी खडी़ बोली की गंभीर कई रचनाओं का वाचन कर सबको आशीर्वाद शुभकामनाएं देते हुए आयोजन को विराम दिया।

इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी एडवोकेट, त्रिपुरारी मिश्रा, संदीप कुमार शुक्ल, ऋषभ , ठाकुर कुशवाहा समेत कई लोग उपस्थित रहे।

IMG 20260928 WA0019
IMG 20260928 WA0020

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1544
वोट करें

भारत की राजधानी क्या है?