आशा कार्यकत्रीयों ने कलेक्ट्रेट पर किया विरोध प्रदर्शन

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अमित मिश्रा

सोनभद्र। कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उत्तर प्रदेश आशा वर्कर यूनियन बैनर तले कार्यकर्ताओं ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री नामित विज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को देकर बुलंद की आवाज।

प्रदेश की विधान सभा के जारी सत्र में 2025 का बजट प्रस्तुत किया गया। पूरे बजट में प्रदेश भर में स्वास्थ्य अभियानों में अगुआ की भूमिका निभा रही आशा कर्मियों की बेहतरी, उनके जीवन जीने लायक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और उनकी सेवाओं की निरंतरता के सम्बन्ध में कोई चिंता नहीं की गई।
45 व 46 वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिस के अनुरुप कर्मचारी के रूप में मान्यता देने, न्यूनतम ईएसआई, ईपीएफ, ग्रेड्यूटी देने की दशक भर से उठ रही मांगों को अनसुना कर दिया गया। वेतन,
प्रदेश में पिछले वर्ष 2 फरवरी को मिशन निदेशक के साथ हुई वार्ता में वर्ष 2019 से 2023 तक के और कुछ कृत कार्यों की एक दशक से बकाया प्रोत्साहन राशि के 1 लाख करोड़ से अधिक लापता भुगतान में अधिकांश की अदायगी का विश्वास दिलाया गया था किंतु एक वर्ष बीत जाने के बाद उस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखाई गई। बजट में आशा वर्कर्स के वर्षों से उठ रहे सवालों को अनसुना कर दिया गया है। महोदय ‌द्वारा वर्ष 2021 के दिसंबर माह में आशा को
रु 6700/और संगिनी को 11500/रु भुगतान करने का बयान आज भी सदन में एक प्रश्न के उत्तर ए बताया गया किंतु यह मिथ्या है। प्रदेश की किसी एक भी आशा कर्मी को यह कथित भुगतान नहीं मिलता है। कई बार निदेशालय और सरकार महोदय से जानने के लिए और यह राशि भुगतान कराए जाने के लिए याचना की गई किंतु कोई कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। वहीं प्रदेश में आशा कर्मियों के कार्यों के टेप मिलने वाली प्रोत्साहन राशियों में किन दिन खोलकर दिखाओ वसूली बेनामी खातों में धान के स्थानांतरण और उनके नकदी कारण का खेल जारी है । इस मौके पर जानकी देवी सोनू सिंह सुमित्रा पार्वती विमल गीता सुमन नीलम उषा संगीता आदि लोग मौजूद रहे।

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