पी के चौबे
सोनभद्र। जिले में 13,392 मनरेगा मजदूर अभी भी राशन कार्ड से वंचित हैं, जिसके चलते उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की मुफ्त खाद्यान्न योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन योजनाओं के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दरों पर या मुफ्त में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन राशन कार्ड न होने के कारण ये मनरेगा मजदूर इस महत्वपूर्ण सुविधा से वंचित हैं।
हाल ही में राज्य शासन ने ऐसे मजदूरों का विस्तृत डाटा जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) जागृति अवस्थी ने इस संबंध में डीसी मनरेगा और सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) को निर्देश दिए हैं कि 25 मार्च तक सभी मजदूरों की फैमिली आईडी बनाई जाए, ताकि उन्हें योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।

फैमिली आईडी बनने से योजनाओं का होगा सीधा लाभ
प्रदेश सरकार ने गरीबों और मजदूरों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए फैमिली आईडी बनाने का निर्णय लिया है। फैमिली आईडी बनने के बाद मजदूरों को खाद्यान्न वितरण योजना समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
फैमिली आईडी के जरिए विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे पात्र लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के लाभ पहुंचाया जा सके। जिनके पास पहले से राशन कार्ड है, उनकी फैमिली आईडी स्वतः बन गई है। लेकिन जिले में हजारों मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिनका राशन कार्ड अब तक नहीं बन सका है।
शासन ने जारी की ब्लॉकवार सूची
हाल ही में जनशक्ति नियोजन प्रभाग ने शासन स्तर पर ब्लॉकवार मनरेगा मजदूरों की सूची जारी की है। इस सूची में कुल 13,392 मजदूरों के नाम शामिल हैं, जिनका अभी तक राशन कार्ड नहीं बन पाया है।

ब्लॉकवार मनरेगा मजदूरों की संख्या:
- म्योरपुर: 2,022
- चोपन: 1,989
- घोरावल: 1,882
- कोन: 1,591
- रॉबर्ट्सगंज: 1,498
- बभनी: 1,419
- दुद्धी: 908
- करमा: 769
- नगवां: 725
- चतरा: 589
म्योरपुर में सबसे ज्यादा वंचित मजदूर
ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार, म्योरपुर ब्लॉक में सबसे ज्यादा 2,022 मजदूर राशन कार्ड से वंचित पाए गए हैं। इसके बाद चोपन में 1,989 और घोरावल में 1,882 मजदूरों का नाम सूची में है। वहीं चतरा ब्लॉक में सबसे कम 589 मजदूर वंचित हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी?
डीसी मनरेगा रवींद्र वीर यादव ने बताया कि शासन से प्राप्त सूची के अनुसार जिले में 13,392 मजदूरों का राशन कार्ड नहीं है। सीडीओ ने निर्देश दिया है कि 25 मार्च तक सभी वंचित मजदूरों की फैमिली आईडी बना ली जाए।
उन्होंने बताया कि फैमिली आईडी बनाने के लिए गांव-गांव में टीमें भेजी जा रही हैं। इन टीमों के माध्यम से मजदूरों का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के दौरान यह भी पाया गया है कि कुछ मजदूरों के पहले से राशन कार्ड बने हुए हैं, लेकिन कई मजदूर अभी भी वंचित हैं।
रवींद्र वीर यादव ने कहा,
“हमारी टीम लगातार गांवों में जाकर मजदूरों की पहचान कर रही है। कई मामलों में पुराने राशन कार्ड भी मिल रहे हैं। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनकी फैमिली आईडी बनाई जा रही है। हमारा लक्ष्य है कि 25 मार्च तक सभी मजदूरों का पंजीकरण कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।”
फैमिली आईडी बनने के बाद क्या होगा फायदा?
फैमिली आईडी बनने के बाद मजदूरों को कई सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित योजनाएं शामिल हैं:
- मुफ्त खाद्यान्न योजना: प्रत्येक गरीब परिवार को हर महीने 5 किलो राशन मुफ्त।
- प्रधानमंत्री आवास योजना: पक्के मकान का लाभ।
- उज्ज्वला योजना: मुफ्त गैस कनेक्शन।
- आयुष्मान भारत योजना: 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा।
- वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन योजना: वृद्ध और विधवा महिलाओं को पेंशन।
प्रशासन ने कसी कमर
जिला प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए कमर कस ली है। सभी बीडीओ और ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया गया है कि वे मजदूरों की सूची का सत्यापन कर समय पर फैमिली आईडी तैयार करें।
सीडीओ जागृति अवस्थी ने कहा कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीडीओ और अन्य अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 25 मार्च तक लक्ष्य हर हाल में पूरा होना चाहिए।
मजदूरों की उम्मीदें बढ़ीं
फैमिली आईडी बनने के बाद मजदूरों में उम्मीद जगी है कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। कई मजदूरों ने प्रशासन से इस कार्य को तेजी से पूरा करने की मांग की है।
रामलाल (म्योरपुर निवासी) ने कहा,
“हमारे पास राशन कार्ड नहीं है, इसलिए मुफ्त अनाज नहीं मिल पाता। अगर फैमिली आईडी बन जाएगी तो कम से कम परिवार का पेट तो भरेगा।”







