एनजीटी की गाइडलाइन कागजों तक सीमित, खुले वाहनों में हो रहा फ्लाईऐश और कोयले का परिवहन
म्योरपुर (सोनभद्र)। सिंगरौली परिक्षेत्र में फ्लाईऐश और कोयले का परिवहन खुले वाहनों में हो रहा है। बिजली बनाने के बाद निकलने वाली राखड़ का अधिकतम उपयोग कर प्रदूषण कम करने के लिए एनजीटी ने गाइडलाइन जारी की है, लेकिन कंपनियों में पालन नहीं हो रहा।
ओवरलोड वाहनों से राखड़ का गीला मलबा सड़क पर गिरता है और सूखकर धूल बनकर उड़ता है। सिंगरौली से सोनभद्र जिले की सीमा तक मुख्य मार्ग पर यही समस्या है। शक्तिनगर, खड़िया, बीना, ककरी, रेणुसागर, अनपरा, बीजपुर, बभनी, म्योरपुर सहित क्षेत्रों में लोग धूल से परेशान हैं और सांस की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं।
सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि राखड़ के ढेर से उठ रही धूल से यूपी का इलाका भी प्रभावित है, कोई सुनने वाला नहीं है। पर्यावरण कार्यकर्ता प्रशांत दुबे ने कहा कि दुकानों और घरों में राख की धूल घुस रही है, सुनवाई नहीं हो रही।
एनजीटी गाइडलाइन के अनुसार फ्लाईऐश का परिवहन बंद कैप्सूल वाहन में हो, समय निर्धारित हो, वाहन ओवरलोड न हों, निर्धारित रूट की नियमित सफाई हो और वाहन समूह में निर्धारित गति से चलें, लेकिन जमीनी हकीकत में इसका पालन नहीं हो रहा।










