अमित मिश्रा
O- सोनभद्र के किसान परिवार की बेटी शिवांगी दुबे ने UPSC भू-वैज्ञानिक परीक्षा में AIR-9 हासिल कर केंद्रीय भू-गर्भ विभाग में वैज्ञानिक का पद पाया।
O- जानिए उनकी संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी।
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। एक साधारण किसान परिवार की बेटी ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर वो मुकाम हासिल किया है, जिसके लिए लाखों युवा सपना देखते हैं।
सोनभद्र की बेटी शिवांगी दुबे ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भू-वैज्ञानिक परीक्षा (Geo-Scientist Examination) में ऑल इंडिया रैंक-9 हासिल की है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ उनका चयन केंद्रीय जल एवं भूगर्भ मंत्रालय / केंद्रीय भू-गर्भ विभाग में वैज्ञानिक के पद पर हुआ है। शिवांगी की इस उपलब्धि पर आज पूरा सोनभद्र ही नहीं, बल्कि पूरा उत्तर प्रदेश गर्व कर रहा है।
किसान परिवार की बेटी का बड़ा सपना
शिवांगी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता सी. बी. दुबे किसान हैं और माता गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई को हमेशा पहली प्राथमिकता दी।

शिवांगी ने बचपन से ही बड़े सपने देखे थे। उनका मानना था कि अगर मेहनत सच्ची हो तो गांव की बेटी भी दिल्ली तक का सफर तय कर सकती है। आज उनकी सफलता ने इस बात को सच साबित कर दिया है।
LKG से 12वीं तक एक ही स्कूल, फिर BHU का सफर
शिवांगी ने अपनी स्कूली शिक्षा सोनभद्र के प्रकाश जीनियस स्कूल से पूरी की। उन्होंने LKG से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई इसी विद्यालय में की। स्कूल के दिनों से ही शिवांगी पढ़ाई में अव्वल थीं। शिक्षक बताते हैं कि वह शुरू से ही अनुशासित, जिज्ञासु और मेहनती छात्रा रही हैं।
12वीं के बाद शिवांगी ने देश के प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में बीएससी जियो-फिजिक्स में दाखिला लिया। लेकिन यह सफर आसान नहीं था। BHU की प्रवेश परीक्षा को पास करने में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार ऐसा लगा कि शायद यह सपना टूट जाएगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
शिवांगी कहती हैं, “BHU में एडमिशन के लिए एंट्रेंस पास करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। लेकिन एडमिशन के बाद सभी प्रोफेसरों का बड़ा सहयोग मिला, जिससे मैं यहां तक पहुंच पाई।”

BHU के प्रोफेसरों ने दिया मार्गदर्शन, फिर एक के बाद एक सफलता
BHU में पढ़ाई के दौरान शिवांगी को प्रोफेसरों का भरपूर मार्गदर्शन मिला। जियो-फिजिक्स जैसे कठिन विषय को उन्होंने गहराई से समझा और शोध की ओर रुख किया।
UPSC क्रैक करने से पहले ही शिवांगी पीएचडी, CSIR-NET और JRF जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर चुकी थीं। यह उनकी प्रतिभा, धैर्य और निरंतर मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने हर पड़ाव को पार किया।
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए शिवांगी कहती हैं, “मेरे माता-पिता और प्रोफेसरों ने मेरा हौसला बढ़ाया, मेरा मनोबल टूटने नहीं दिया। जब भी मैं निराश होती थी, माता-पिता कहते थे – बेटा तुम कर सकती हो। आज उसी विश्वास की वजह से मैं यहां हूं।”
घर में खुशी का माहौल, दादा ने खिलाई मिठाई
शिवांगी की सफलता की खबर मिलते ही घर में खुशी का माहौल छा गया। परिवार के लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी। इस ऐतिहासिक पल पर शिवांगी के दादा पंच्चानन्द दुबे ने उन्हें मिठाई खिलाकर खुशियां मनाईं।
पिता सी. बी. दुबे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बेटी ने किसान परिवार का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है। गांव और आसपास के लोग भी शिवांगी के घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं। स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों ने भी इस उपलब्धि पर गर्व जताया है।
देश की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
शिवांगी दुबे की सफलता आज देश के हजारों युवाओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है। एक किसान की बेटी का UPSC में टॉप-10 में आना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। जरूरत है तो बस सही दिशा, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग की।
शिवांगी दुबे ने बताया की – “ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को सपने देखने से नहीं डरना चाहिए। यदि लगन और मेहनत हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।”
अब शिवांगी जल्द ही केंद्रीय जल एवं भूगर्भ मंत्रालय में वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवा शुरू करेंगी और देश के जल संसाधनों और भूगर्भीय शोध के क्षेत्र में अपना योगदान देंगी।









