अमित मिश्रा
पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली एवं महिला सुरक्षा सम्मेलन का भव्य आयोजन
सोनभद्र में वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं विभिन्न विभागों की गरिमामयी सहभागिता
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। जनपद पुलिस के द्वारा बुधवार को पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली एवं महिला सुरक्षा सम्मेलन का भव्य आयोजन एक निजी होटल के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ सुनीता कृष्णन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया जिसके बाद स्कूली छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
इस कार्यक्रम में महिला जनपद में स्थापित 10 मिशन शक्ति केन्द्रों की कार्यप्रणाली एवं उपलब्धियों की जानकारी। जेंडर बेस्ड विलेंस एवं ट्रेउमा इनफार्मेड केयर (पीड़ित केन्द्रित प्रणाली) पर विस्तृत चर्चा। महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम हेतु रणनीतियों पर विचार-विमर्श।
मुख्य वक्ता डॉ0 सुनीता कृष्णनन ने बताया कि उन्होंने अब तक लगभग 32,000 से अधिक पीड़ित व पीड़िताओं को चाइल्ड हैरेसमेंट, यौन उत्पीड़न एवं मानव तस्करी से मुक्त कराकर न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता एवं त्वरित न्याय की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में महत्वपूर्ण विधिक एवं सामाजिक विषयों पर विस्तृत चर्चा-सम्मेलन के दौरान निम्न प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदान की गई— सेक्स एवं जेंडर की अवधारणा-
लिंग (सेक्स ) एवं सामाजिक लिंग (जेंडर ) के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए बताया गया कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जड़ में लैंगिक असमानता एवं सामाजिक पूर्वाग्रह महत्वपूर्ण कारक हैं।
नेचर ऑफ़ क्राइम अगेंस्ट वीमेन महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की प्रकृति, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, मानव तस्करी, साइबर अपराध आदि के बदलते स्वरूप पर चर्चा की गई।
क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम एवं अन्य स्तकेहोल्डर्स पुलिस, अभियोजन, न्यायालय, विधिक सेवा प्राधिकरण, वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति एवं सामाजिक संस्थाओं की समन्वित भूमिका पर बल दिया गया।
विक्टिमस एंड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम
पीड़ितों के अधिकार, गोपनीयता, सम्मान एवं न्यायिक प्रक्रिया में सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
फीचर्स ऑफ़ ओर लीगल फ्रेमवर्क
भारतीय विधिक ढांचे की प्रमुख विशेषताओं, महिला एवं बाल संरक्षण संबंधी कानूनों की जानकारी दी गई।
रोले ऑफ सर्विस प्रोवाइडर्स & एजेंसी कोऑर्डिनेशन
सेवा प्रदाताओं एवं विभिन्न एजेंसियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति पर बल दिया गया।
बेनिफिट्स ऑफ़ ट्रेउमा इनफार्मेड सर्विसेज: पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार, पुनः आघात से बचाव एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया।
पॉसो एक्ट एवं चाइल्ड मैरिज एक्ट , प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफन्सेस एक्ट पॉसो एक्ट तथा प्रोहिबीशन ऑफ़ चाइल्ड मैरिज एक्ट के प्रावधानों, दंडात्मक व्यवस्थाओं एवं बाल संरक्षण में उनकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी गई।
मिशन शक्ति केन्द्रों पर पीड़िताओं के साथ संवेदनशील एवं शालीन व्यवहार पर विशेष जोर- सम्मेलन में महिला आरक्षियों को निर्देशित किया गया कि मिशन शक्ति केन्द्रों पर आने वाली प्रत्येक पीड़िता के साथ सम्मानजनक, गोपनीय एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए।
उन्हें विधिक, चिकित्सीय एवं मनोवैज्ञानिक सहायता हर संभव स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। डॉ0 सुनीता कृष्णन ने कहा कि पीड़ित केन्द्रित न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल अपराध पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़िता को सुरक्षित वातावरण, भावनात्मक सहयोग एवं न्यायिक प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान करना भी है। सोनभद्र पुलिस महिला सुरक्षा, पीड़ित सम्मान एवं संवेदनशील पुलिसिंग हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा समाज के सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर महिला सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में पीयूष मोर्डिया (अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन), आरपी सिंह (पुलिस महानिरीक्षक, विंध्याचल परिक्षेत्र), जिलाधिकारी बीएन सिंह, पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा , पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर अपर्णा रजत कौशिक, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार, क्षेत्राधिकारी नगर, रणधीर मिश्रा, अमित कुमार, राहुल पाण्डेय, हर्ष पाण्डेय समस्त क्षेत्राधिकारीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला प्रोवेशन विभाग, वन स्टॉप सेंटर एवं बाल कल्याण समिति के अधिकारीगण सहित वाराणसी जोन के 09 जनपदों के महिला एवं पुरुष अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।






