अमित मिश्रा
O- पारिवारिक विवाद के बाद घर से निकले राजेश ने लगाई थी मौत की छलांग, तीन दिन तक चलती रही तलाश, चौथे दिन मिला शव
सोनभद्र । सदर कोतवाली क्षेत्र के अक्छोर गांव में रविवार की सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब तालाब में एक शव उतराया दिखाई दिया। पहचान होने पर पता चला कि यह शव चार दिन पहले लापता हुए 45 वर्षीय राजेश भारती का है। ग्रामीणों ने जैसे ही यह मंजर देखा, पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और मातम छा गया।
राजेश भारती पुत्र स्व. रामजीत, निवासी ग्राम सभा धोबही, टोला खड़ेहरी, बीते गुरुवार की शाम घर पर विवाद के बाद नाराज होकर निकला था। परिजनों के अनुसार राजेश ने गुस्से में कहा था कि वह अब मर जाएगा। इसके बाद वह घर से करीब पांच सौ मीटर दूर अक्छोर टोला के मंदिर के पास बने तालाब तक पहुंचा और वहां कपड़े उतारकर कूद गया।

तीन दिन तक गोताखोरों और पुलिस ने की खोज, नहीं मिला सुराग
घटना की जानकारी मिलने पर शुक्रवार की सुबह नई बाजार चौकी इंचार्ज ओम प्रकाश यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों और गोताखोरों की मदद से घंटों तलाशी ली गई, मगर राजेश का कोई पता नहीं चला।
शनिवार को भी पुलिस और परिजनों ने दोबारा खोजबीन की, लेकिन तालाब से कुछ बरामद नहीं हुआ।
रविवार सुबह तालाब में दिखी लाश, गांव में मचा हड़कंप
रविवार की सुबह टहलने गए ग्रामीणों की नजर तालाब में उतराए एक शव पर पड़ी। खबर फैलते ही लोग मौके पर उमड़ पड़े।
112 पुलिस टीम तत्काल पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को बाहर निकाला गया। पहचान होते ही घर में कोहराम मच गया।
परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव गूंज उठा।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच में जुट गई है।
गुस्से में गया था… अब सन्नाटा छोड़ गया
गांव के लोग राजेश की मौत को अब भी विश्वास नहीं कर पा रहे।
एक पड़ोसी ने कहा — “राजेश बहुत शांत स्वभाव का था, घर की बात पर इतना बड़ा कदम उठाएगा, किसी ने सोचा भी नहीं था।”
अब गांव के उस तालाब को देखकर हर किसी की रूह कांप जाती है।
जहां कभी बच्चे खेला करते थे, वहीं अब सिर्फ खामोशी और डर पसरा है।
घटनाक्रम क्या हुआ संक्षेप में
- गुरुवार रात : घर में विवाद के बाद राजेश तालाब की ओर गया
- शुक्रवार–शनिवार : पुलिस व गोताखोरों ने की तलाश, कोई सुराग नहीं
- रविवार सुबह : तालाब में उतराया शव मिला, गांव में मचा कोहराम
- पुलिस : शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जांच जारी
मौत की खामोश कहानी… जिसने पूरे गांव को हिला दिया
एक पल का गुस्सा… और हमेशा के लिए बुझ गई जिंदगी की लौ।
चार दिन तक गांव के लोग उम्मीद की डोर थामे रहे, मगर आखिरकार तालाब ने ही जवाब दिया।







