प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर का वार्षिकोत्सव बना प्रेरणा का संदेश

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अमित मिश्रा

O- शिक्षा में बदलाव की मिसाल, विधायक भूपेश चौबे बोले – “सरकारी स्कूल अब प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे”

वैनी (सोनभद्र)। नागँवा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भैरोपुर में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि बदलते भारत में सरकारी विद्यालय अब पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि गुणवत्ता और संस्कार की नई मिसाल बन रहे हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक भूपेश चौबे तथा विशिष्ट अतिथि ब्लॉक प्रमुख आलोक चौबे रहे।

शिक्षा में बदलाव की नई कहानी

कभी जिस विद्यालय को शिक्षा-विहीन समझा जाता था, आज वही विद्यालय निजी स्कूलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों, संसाधनों के विस्तार और शिक्षकों की मेहनत से सरकारी स्कूलों की तस्वीर तेजी से बदली है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बच्चे आज लगन और परिश्रम के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।

सरस्वती वंदना से देशभक्ति और पर्यावरण संदेश तक

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद सीमा पर तैनात वीर सैनिकों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। पर्यावरण संरक्षण पर झांकी प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने संदेश दिया –
“पेड़ लगाइए, पेड़ काटिए मत; पेड़ नहीं रहेगा तो ऑक्सीजन नहीं रहेगा, और जीवन समाप्त हो जाएगा।”

बच्चों की इस भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

विधायक भूपेश चौबे का दमदार बयान

मुख्य अतिथि विधायक भूपेश चौबे ने अपने संबोधन में कहा-

“आज उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालय किसी से कम नहीं हैं। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव किया है। संसाधन, स्मार्ट क्लास, पुस्तकें और प्रशिक्षित शिक्षक, सब मिलकर गांव के बच्चों को नई उड़ान दे रहे हैं। जो स्कूल कभी उपेक्षा का शिकार थे, आज वही प्रतिभा के केंद्र बन रहे हैं। यह बदलाव केवल भवन का नहीं, बल्कि सोच का परिवर्तन है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में अपार क्षमता है और सही मार्गदर्शन मिलने पर वे देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

सम्मान और उपस्थिति

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक मेघा सौनाकिया ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विकास मिश्रा, मनोज जायसवाल, देवी सिंह, अशोक त्रिपाठी, इंदु प्रकाश सिंह, अखिलेश सिंह वत्स, अरुणेश पांडेय (अध्यापक), दिलीप पाठक, रमेश सिंह पटेल, अरविंद सिंह पटेल, संजय यादव, मुकेश यादव, सुधीर कुमार, गौरव कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सरकार का प्रयास, बदली तस्वीर, बढ़ता विश्वास

आज हालात यह हैं कि जिस विद्यालय को कभी हेय दृष्टि से देखा जाता था, उसी विद्यालय में प्रवेश के लिए अभिभावकों की कतार लग रही है। यह परिवर्तन केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

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