अमित मिश्रा
O- कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के इको-सेंसिटिव ज़ोन में अवैध निर्माण का आरोप
नई दिल्ली/सोनभद्र। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीष चौबे द्वारा दायर आशीष चौबे बनाम एसीपी टोलवेज प्राइवेट लिमिटेड मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। यह मामला सोनभद्र के लोधी क्षेत्र में संचालित एक टोल प्लाजा को लेकर है, जिस पर कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के इको-सेंसिटिव ज़ोन में नियमों के विपरीत निर्माण करने का आरोप लगा है।

क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2022 में आशीष चौबे ने एनजीटी में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एसिपी टोलवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) से अनापत्ति प्रमाणपत्र (EC) के बिना ही टोल प्लाजा, आवास और अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं। यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिए संवेदनशील माना जाता है, जहां बिना अनुमति के निर्माण गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघन है।
ज्वाइंट कमेटी ने क्या पाया?
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक ज्वाइंट कमेटी गठित की थी, जिसने अपनी जांच में चौंकाने वाले खुलासे किए:
- NBWL से कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिला।
- लेआउट प्लान का उल्लंघन करके सड़क, आवास, टोल प्लाजा और ऑफिस बनाए गए।
- पर्यावरण संबंधी अन्य नियमों का भी उल्लंघन हुआ है।
4 साल बाद फैसला सुरक्षित
ज्वाइंट कमेटी की रिपोर्ट के बाद याचिकाकर्ता के दावे सही साबित हुए, और एनजीटी ने दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद 2025 में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

अब क्या होगा?
याचिकाकर्ता ने टोल प्लाजा के डिमोलिशन और टोल कलेक्शन पर रोक की मांग की है। अब पूरे मामले की नजर एनजीटी के फैसले पर टिकी है। क्या पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए इस टोल प्लाजा को गिराया जाएगा? या कंपनी को भारी जुर्माना झेलना पड़ेगा?
एसीपी टोल प्लाजा पर जल्द ही आएगा बड़ा फैसला ।







