मध्य प्रदेश के निवासी युवको ने फर्जी प्रमाण पत्रो पर यूपी पुलिस मे पायी नौकरी, मुकदमा दर्ज

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अमित मिश्रा

फर्जी जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनावाया

मध्य प्रदेश में ओबीसी तो यूपी में है बैसवार अनुसूचित जाति

चार युवकों पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)।  यूपी पुलिस मेंआरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर सीधी भर्ती 2023 में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला सामने आया है।पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश के कई अभ्यर्थियों ने यूपी का फर्जी जाति और निवास प्रमाणपत्र लगाकर आरक्षण का लाभ उठाया और भर्ती में सफलता हासिल की। इस मामले में जनपद के घोरावल थाने में अभियोग दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक के आदेश पर हुई इस जांच में चौकाने वाली बातें सामने आईं। जांच अधिकारी एसआई रामजान सिंह यादव ने पाया कि चयनित अभ्यर्थियों ने खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी और अनुसूचित जाति का होने का दावा किया, जबकि हकीकत में वे मध्य प्रदेश के निवासी निकले।

पुलिस की जांच में सबसे पहले उमेश कुमार वैश्य का मामला सामने आया। उन्होंने खुद को सोनभद्र निवासी और अनुसूचित जाति का बताया था। लेकिन हकीकत में वह सिंगरौली (मध्य प्रदेश) के निवासी हैं और वहां बैसवार जाति अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है।

इसी तरह विजय कुमार का सच भी खुला। उसने आवेदन पत्र में खुद को सोनभद्र का निवासी और अनुसूचित जाति का दिखाया, जबकि जांच में साबित हुआ कि वह भी सिंगरौली (मध्य प्रदेश) का निवासी है और बैसवार जाति का है।

तीसरे अभ्यर्थी राकेश सिंह वैस का मामला भी अलग नहीं निकला। उन्होंने भी फर्जी तरीके से उत्तर प्रदेश का पता दिखाकर जाति प्रमाणपत्र लिया और भर्ती में आरक्षण का लाभ उठाया।

दीपक कुमार वैश का नाम भी इस फर्जीवाड़े में शामिल पाया गया। उसने भी गलत पता और जाति प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हासिल की। जांच में पुष्टि हुई कि वह भी मध्य प्रदेश का निवासी है और बैसवार जाति का है।

जांच के बाद साफ हो गया कि इन सभी अभ्यर्थियों ने सुनियोजित तरीके से उत्तर प्रदेश का निवासी बनकर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराया और उसे भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल किया।

इस सम्बंध में पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा का कहना है कि अभ्यर्थियों ने आरक्षण का लाभ पाने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया और असल प्रमाणपत्र के रूप में उनका प्रयोग किया। यह अपराध भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर श्रेणी में आता है। पुलिस अब इन अभ्यर्थियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। मुकदमा दर्ज होने के बाद पूरे मामले की तहकीकात तेज कर दी गई है।

इस खुलासे के बाद पुलिस भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि आगे इस फर्जीवाड़े में और कितने नाम सामने आते हैं।

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