अमित मिश्रा
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारे से समूचा कथा स्थल गुंजायमान हो गया
श्री मद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण के बाललीला,माखन चोरी, व्रजरज का महत्व, कालिया मर्दन प्रसंग की कथा सुनाई गई
सोनभद्र(उत्तर प्रदेश)। गोवर्धन पर्वत की कथा का सारांश बतलाते हुए श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे व्यास ने कहा कि प्रकृति एवं ब्रह्म को भूलना नहीं चाहिए, जिसे सुनकर समस्त जनमानस श्रोता समुदाय आनन्द स्वरूप परमात्मा के आनन्द में आनन्दित हुए। श्री मद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की झांकी निकाली गई। इस दौरान हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारे से समूचा कथा स्थल गुंजायमान हो गया। भगवान श्री कृष्ण का दर्शन करने का तांता लगा रहा।
श्री मद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस के अवसर पर परम अरुण कृष्ण शास्त्री ने परब्रह्म भगवान श्री कृष्ण के पावन बाललीला एवं पूतना मोक्ष , भगवान के माखन चोरी की लीला, व्रजरज का महत्व , ब्रह्मादिक देवताओं का मान मर्दन एवं कालीयमर्दन के पावन प्रसंगों का सुन्दरतम् कथा के द्वारा समस्त श्रोता समुदाय को भागवतीय सरिता में सराबोर किया। जिसमें भगवान् के ही दिव्य स्वरूप में प्रतिष्ठित गोवर्धन भगवान् की पावन कथा का रसास्वादन कराया गया।
श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतवर्ष में जन्म लेना सुन्दरतम् सौभाग्य का उदय होना है। भारतवर्ष के पत्ता, पानी, पत्थर में भी इतना सामर्थ्य है कि समस्त जनमानस को गोविंद के अलभ्य कृपा का भी लाभ प्रदान करता है। पावन गोवर्धन भगवान् के महत्व को बताते हुए व्यास जी ने कहा कि गाय , ब्राह्मण, संत , पर्वत , माता ,पिता , भारतीय परिपाठी में इन्हें प्रत्यक्ष देवस्वरूप में स्वीकार किया है।
इस अवसर पर यज्ञ के आचार्य सूरज पाण्डेय जी , पं० सतीश पाण्डेय, अर्जुन तिवारी, सुन्दरम् ओझा, अभिषेक पाठक, राजेश कुमार पाठक, नितेश पाठक , सुशील त्रिपाठी, प्रशान्त कुमार मिश्र, दिनेश पाण्डेय, गणेश दूबे, पंकज पाण्डेय, प्रिया पाठक, सुशीला पाठक, सुघरा पाठक, उषा पाठक, अनुराग पाठक, प्रिंस पांडेय, ललित पांडेय, सनोज पांडेय एवं समस्त भगवत्प्रेमी भक्त संगीत के सुमधुर कलाकार उपस्थित रहे।







